Justice Ashwani Kumar Mishra : जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने सोमवार, 7 सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 37वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ले ली। चंडीगढ़ स्थित पंजाब लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

Written by Kajal Panchal • Published on : 7 September 2026
IBN24 NEWS NETWORK : जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और केंद्र सरकार के बीच विवाद सामने आया था। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनकी नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि इस प्रक्रिया में पंजाब सरकार की सहमति नहीं ली गई। इसी विरोध के चलते मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब सरकार का कोई मंत्री शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुआ। वहीं, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष समारोह में मौजूद रहे।
जस्टिस शील नागू के बाद संभाली जिम्मेदारी
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा से पहले जस्टिस शील नागू पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस थे। जून 2026 में जस्टिस शील नागू की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर हो गई थी। इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का पद खाली हुआ। अब जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने इस पद की जिम्मेदारी संभाल ली है।
भगवंत मान सरकार ने नियुक्ति का किया था विरोध
पंजाब की AAP सरकार ने जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना था कि चीफ जस्टिस की नियुक्ति से पहले पंजाब सरकार से सहमति नहीं ली गई।

मान सरकार ने नियुक्ति पर रोक लगाने और शपथ ग्रहण समारोह को आगे बढ़ाने की मांग भी की थी। रविवार, 6 सितंबर को मुख्यमंत्री ने इमरजेंसी कैबिनेट मीटिंग बुलाकर नियुक्ति के खिलाफ प्रस्ताव पास कराया था। पंजाब सरकार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से भी मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की थी।
वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने आरोप लगाया कि चीफ जस्टिस की नियुक्ति में स्टैंडर्ड प्रोसीजर का पालन नहीं किया गया। उनका कहना था कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति संवेदनशील प्रक्रिया है और इसमें संबंधित राज्य सरकार की राय को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। चीमा ने कहा कि पंजाब को इस मामले में इग्नोर किया गया है और नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार से सवाल पूछा जाना चाहिए।
जस्टिस संधावालिया की नियुक्ति का भी दिया उदाहरण

हरपाल चीमा ने अपने आरोपों के समर्थन में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर मोस्ट जज जीएस संधावालिया की नियुक्ति का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, 11 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट के CJI और पूरे कॉलेजियम ने जस्टिस जीएस संधावालिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की थी। हालांकि, पंजाब सरकार के आरोप के मुताबिक उनकी नियुक्ति को लेकर केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से दो महीने से अधिक समय तक मंजूरी नहीं दी गई।
चीमा के अनुसार, 17 सितंबर 2024 को जस्टिस संधावालिया की नियुक्ति हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर की गई। पंजाब सरकार ने सवाल उठाया कि पहले की सिफारिश पर निर्णय में देरी क्यों हुई, इसका स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।
मेमोरेंडम के पैरा 6 का दिया हवाला
पंजाब सरकार की ओर से कहा गया है कि चीफ जस्टिस की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया के मेमोरेंडम के पैरा 6 में संबंधित राज्य सरकार की राय और सहमति का प्रावधान है।
हरपाल चीमा के मुताबिक, जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति के मामले में 12 अगस्त 2026 को पंजाब के राज्यपाल की ओर से मुख्यमंत्री भगवंत मान को भेजे गए पत्र और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के पत्र में भी इसी पैरा 6 का उल्लेख किया गया था। पंजाब सरकार का आरोप है कि इसके बावजूद उसकी सहमति लिए बिना जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया।
कौन हैं जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ?
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ था। उन्होंने किरोड़ीमल कॉलेज से बीए ऑनर्स इकोनॉमिक्स और दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की पढ़ाई की। उन्होंने 8 मई 1993 से वकालत की शुरुआत की। साल 2013 में उन्हें सीनियर एडवोकेट नामित किया गया। इसके बाद 3 फरवरी 2014 को उनकी प्रारंभिक न्यायिक नियुक्ति हुई।

Justice Ashwani Kumar Mishra
जस्टिस मिश्रा को 3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 1 फरवरी 2016 को वे स्थायी न्यायाधीश बने। इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनका कार्यकाल 20 जुलाई 2025 तक रहा। 21 जुलाई 2025 को उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में कार्यभार संभाला। इसके बाद 2 जून 2026 से वे इस हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब 5 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार की ओर से उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किए जाने की अधिसूचना जारी की गई और 7 सितंबर को उन्होंने पद की शपथ ले ली।
सिविल, संवैधानिक और सर्विस मामलों में रहा अनुभव
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को सिविल, संवैधानिक और सर्विस से जुड़े मामलों की पैरवी का लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने नोएडा, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, इलाहाबाद विकास प्राधिकरण, इफको, आईओसी और यूपी पावर कॉरपोरेशन जैसी संस्थाओं के लिए भी वकील के तौर पर पैरवी की है।
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