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FSSAI Notice Nestle : मैगी के पैकेट में कीड़े मिलने की शिकायत पर नेस्ले को FSSAI का नोटिस, KFC और फ्लिपकार्ट से भी मांगा जवाब, जानिए पूरा मामला ?

FSSAI Notice Nestle
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FSSAI Notice Nestle : देश के सबसे लोकप्रिय इंस्टेंट नूडल ब्रांड मैगी को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर मैगी के एक पैकेट में कीड़े मिलने की शिकायत वायरल होने के बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नेस्ले इंडिया को नोटिस जारी किया है। खाद्य सुरक्षा नियामक ने कंपनी से मामले पर विस्तृत जवाब मांगा है और तत्काल एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपने के निर्देश दिए हैं।

FSSAI Notice Nestle

Written by Kajal Panchal • Published on : 13 June 2026

IBN24 News Network : FSSAI ने जिस बैच को लेकर शिकायत मिली है, उसे एहतियातन बाजार से हटाने के निर्देश भी दिए हैं। वहीं साफ-सफाई और उत्पाद गुणवत्ता से जुड़ी अलग-अलग शिकायतों के आधार पर फास्ट-फूड चेन KFC, ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट इंडिया और हेल्थ फूड ब्रांड ओपन सीक्रेट से भी जवाब तलब किया गया है।

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FSSAI ने नेस्ले से मांगे तीन अहम जवाब

खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण ने नेस्ले इंडिया से तीन प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है।

1. कच्चा माल कहां से आया और जांच कैसे हुई ?

कंपनी को बताना होगा कि शिकायत वाले बैच के निर्माण में इस्तेमाल कच्चा माल किस सप्लायर से आया था। साथ ही उत्पादन और बाजार में भेजने से पहले की गई गुणवत्ता जांच के सभी रिकॉर्ड भी जमा करने होंगे।

2. बाजार से स्टॉक हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए ?

FSSAI ने पूछा है कि शिकायत वाले बैच और उससे जुड़े संभावित प्रभावित उत्पादों को बाजार तथा सप्लाई चेन से हटाने के लिए कंपनी ने तत्काल क्या कार्रवाई की।

3. भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए क्या बदलाव होंगे ?

नियामक ने नेस्ले से यह भी पूछा है कि कंपनी अपने क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम में क्या सुधार करने जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी शिकायतें दोबारा सामने न आएं।

नेस्ले का जवाब : आरोप पूरी तरह गलत

नेस्ले इंडिया ने मैगी में कीड़े मिलने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि यह मामला एक अनवेरिफाइड सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ा है और शिकायतकर्ता से संपर्क नहीं हो पाने के कारण कंपनी को अब तक कथित शिकायत वाला सैंपल भी नहीं मिला है।

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कंपनी का कहना है कि उसने संबंधित बैच के क्वालिटी रिकॉर्ड, बाजार से लिए गए सैंपल और टेस्ट रिपोर्ट्स के साथ सक्षम अधिकारियों के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति पहले ही जमा कर दी है।

लैब जांच में नहीं मिला कोई संक्रमण

नेस्ले इंडिया के अनुसार, कंपनी ने अपने प्लांट्स और बाजार से लिए गए सैंपल की जांच करवाई है। साथ ही FSSAI से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में भी परीक्षण कराया गया।

कंपनी का दावा है कि जांच रिपोर्ट में किसी प्रकार के कीड़े, संक्रमण या उत्पाद में खराबी के प्रमाण नहीं मिले हैं।

नेस्ले ने कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरी पारदर्शिता से सहयोग कर रही है और अंतिम जांच रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है।

2015 का मैगी विवाद फिर आया चर्चा में

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2015 में मैगी को बड़ा झटका लगा था। उस समय FSSAI ने मैगी में तय सीमा से अधिक लेड (सीसा) और MSG लेबलिंग से जुड़े मुद्दों को लेकर कार्रवाई की थी।

उस विवाद के बाद देशभर में मैगी की बिक्री पर असर पड़ा था और कंपनी को बाजार से अपने उत्पाद वापस मंगाने पड़े थे। उपभोक्ताओं का भरोसा दोबारा जीतने में नेस्ले को कई वर्षों का समय लगा था।

ऐसे में मौजूदा विवाद, भले ही अभी केवल जांच के स्तर पर हो, लेकिन इसका असर कंपनी की साख और ब्रांड इमेज पर पड़ सकता है।

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मैगी के अलावा FSSAI ने KFC को भी साफ-सफाई से जुड़ी शिकायतों के मामले में नोटिस जारी किया है। वहीं खजूर आधारित एक उत्पाद में कीड़े मिलने की शिकायत पर फ्लिपकार्ट इंडिया और ओपन सीक्रेट से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

FSSAI का कहना है कि उपभोक्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और सभी मामलों की जांच नियमानुसार की जा रही है।

सोशल मीडिया शिकायतें अब बन रही हैं रेगुलेटरी कार्रवाई का आधार

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले से एक नया ट्रेंड सामने आया है। पहले उपभोक्ता शिकायतों को आधिकारिक कार्रवाई तक पहुंचने में लंबा समय लगता था, लेकिन अब सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली शिकायतें सीधे नियामक एजेंसियों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

इससे खाद्य और क्विक सर्विस कंपनियों के लिए प्रतिष्ठा और संचालन दोनों स्तर पर जोखिम बढ़ गया है। एक वायरल पोस्ट कंपनी को कानूनी जांच, मीडिया कवरेज और उपभोक्ताओं के सवालों के घेरे में ला सकती है।

1984 में भारत आई थी मैगी

मैगी को भारत में 1984 में नेस्ले इंडिया लेकर आई थी। शुरुआत में इसे उन लोगों के लिए पेश किया गया था जिनके पास खाना बनाने के लिए सीमित समय होता था।

1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद बदलती जीवनशैली और आक्रामक विज्ञापन अभियानों के कारण मैगी तेजी से भारतीय घरों का हिस्सा बन गई। “2 मिनट में तैयार” होने का दावा इसकी पहचान बन गया।

आज मैगी नेस्ले इंडिया के सबसे बड़े और सबसे लोकप्रिय ब्रांड्स में शामिल है। यही वजह है कि इससे जुड़ा कोई भी गुणवत्ता या खाद्य सुरक्षा विवाद सीधे कंपनी की साख और उपभोक्ताओं के भरोसे को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल जांच जारी

फिलहाल मामला जांच के अधीन है। एक तरफ FSSAI ने शिकायत को गंभीर मानते हुए नोटिस जारी किया है, वहीं दूसरी तरफ नेस्ले सभी आरोपों को खारिज करते हुए लैब रिपोर्ट का हवाला दे रही है।

अब सभी की नजर FSSAI की जांच और कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले आधिकारिक जवाबों पर है, जिनसे यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

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