Gharaunda CHC Incident : करनाल जिले के घरौंडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में 4 मार्च को हुए चर्चित थप्पड़ कांड का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। जिस मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी दीपक कुमार पर डॉक्टर के साथ मारपीट, अपमानजनक व्यवहार और जबरन हिरासत में लेने के आरोप लगे थे, उसी अधिकारी को करीब 10 दिन पहले दोबारा घरौंडा थाने का प्रभारी नियुक्त कर दिया गया है। इस फैसले के बाद हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस (HCMS) एसोसिएशन ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
Written by Kajal Panchal • Published on : 29 May 2026
IBN24 News Network : एचसीएमएस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है कि जिस अधिकारी पर गंभीर आरोप लगे हों और जिसका मामला अभी अदालत में विचाराधीन हो, उसे उसी स्थान पर दोबारा तैनात करना निष्पक्ष जांच पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की है कि मामले के अंतिम निर्णय तक दीपक कुमार को घरौंडा से हटाकर किसी अन्य थाने में नियुक्त किया जाए।
क्या था 4 मार्च का पूरा मामला ?

4 मार्च को घरौंडा के सरकारी अस्पताल में मेडिकल लीगल केस (एमएलसी) के कुछ मरीज पहुंचे थे। आरोप है कि इन मरीजों ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर प्रशांत चौहान के साथ अभद्र व्यवहार किया। स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टर ने पुलिस सहायता के लिए फोन किया।
स्टाफ के अनुसार, फोन पर डॉक्टर और तत्कालीन थाना प्रभारी दीपक कुमार के बीच तीखी बहस हुई। आरोप है कि बातचीत के दौरान पुलिस की ओर से कहा गया कि “हम तुम्हारे लिए ही थोड़े बैठे हैं”, जिसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी और गाली-गलौच हुई।
अस्पताल पहुंचकर कॉलर पकड़ा, थप्पड़ मारने के आरोप
फोन पर हुए विवाद के बाद दीपक कुमार पुलिस वाहन से अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने डॉक्टर प्रशांत चौहान को बुलाया और सामने आते ही उनका कॉलर पकड़ लिया। इसके बाद उन्हें गाड़ी की ओर ले जाया गया और थप्पड़ मारने सहित मारपीट करने के आरोप भी लगे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तेजी से तूल पकड़ गया।
वीडियो वायरल होने के बाद डॉक्टरों की हड़ताल

घटना के वीडियो सामने आने के बाद मेडिकल एसोसिएशन और डॉक्टर संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। डॉक्टरों ने इसे चिकित्सक समुदाय का अपमान बताते हुए हड़ताल शुरू कर दी, जिससे कई स्थानों पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। डॉक्टरों का कहना था कि ड्यूटी के दौरान चिकित्सकों के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सस्पेंशन के बावजूद नहीं थमा विवाद
विवाद बढ़ने पर पुलिस विभाग ने तत्कालीन एसएचओ दीपक कुमार को निलंबित कर दिया था। हालांकि डॉक्टर संगठनों का कहना था कि केवल सस्पेंशन पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। इसके बाद पीड़ित डॉक्टर प्रशांत चौहान ने न्याय की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया।
सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई
मामला फिलहाल घरौंडा अदालत में विचाराधीन है। जानकारी के अनुसार इस केस में कुल सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई चल रही है, जिनमें दीपक कुमार भी शामिल हैं। अदालत में सुनवाई जारी है और अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।
दोबारा नियुक्ति पर उठे सवाल
बीती 17 मई को दीपक कुमार को फिर से घरौंडा थाने का प्रभारी नियुक्त कर दिया गया। इस फैसले के बाद एचसीएमएस एसोसिएशन ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि इससे निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।
निष्पक्ष जांच पर असर की आशंका
डॉक्टर संगठन का कहना है कि आरोपी अधिकारी अपने पद का प्रभाव इस्तेमाल कर गवाहों, सबूतों और मामले से जुड़े माहौल को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से संगठन ने मांग की है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें किसी अन्य स्थान पर तैनात किया जाए, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।
फिलहाल यह मामला अदालत में लंबित है और सभी पक्ष अंतिम न्यायिक निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।
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