Jantar Mantar Protest Violence : जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए ‘संसद चलो’ प्रदर्शन के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों के परिजनों ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी। परिजनों ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान केवल छात्र ही नहीं, बल्कि हिंसक और असामाजिक तत्व भी मौजूद थे, जिन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला किया।

Written by Kajal Panchal • Published on : 31 July 2026
IBN24 News Network : उनका कहना है कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक विमर्श में अब तक केवल प्रदर्शनकारियों के घायल होने की बात सामने आई, जबकि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से घायल हुए।
घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने लगाए तीन प्रमुख आरोप
1. बेटी गुंजन बोलीं- “पिता की वर्दी खून से लथपथ थी”

घायल पुलिसकर्मी की बेटी गुंजन ने बताया कि उनके पिता जंतर-मंतर पर बैरिकेड के पास ड्यूटी पर तैनात थे। उनके अनुसार, पिता पहले से कह रहे थे कि प्रदर्शन में केवल छात्र नहीं, बल्कि असामाजिक तत्व भी शामिल हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि 20 जुलाई की रात करीब 10 बजे उनके पिता को साथी पुलिसकर्मी घर लेकर आए। उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी। परिवार के अनुसार, भीड़ ने उन्हें घसीटकर पीटा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए और करीब चार घंटे तक राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में बेहोश रहे। गुंजन ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद सोशल मीडिया पर उनके पिता को ही गलत तरीके से पेश किया गया।
2. ASI की पत्नी सीमा का आरोप- पुलिस पर पथराव और हमला हुआ

घायल ASI की पत्नी सीमा ने बताया कि उन्होंने 20 जुलाई की शाम अपने पति को फोन किया तो पता चला कि वे अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। उनके मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ शरारती तत्वों ने पुलिस पर पत्थर और अन्य वस्तुओं से हमला किया, जिससे कई जवान घायल हुए।
उन्होंने कहा कि रात में घर लौटने पर उनके पति ने बताया कि संसद की सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की गई और पुलिस बल पर हमला हुआ। ड्यूटी के दौरान उन्हें मिला हेलमेट भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।
3. ASI के बेटे लक्ष्य सिंह बिष्ट बोले- “पिता के सिर में चार टांके आए”

घायल ASI के बेटे लक्ष्य सिंह बिष्ट ने बताया कि उनके पिता को बहादुरी के लिए चार सम्मान मिल चुके हैं। उनके दादा भी सीमा सुरक्षा बल (BSF) में थे और 1971 के युद्ध में हिस्सा ले चुके थे।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान उनके पिता फ्रंटलाइन में तैनात थे। बाद में पता चला कि उनके सिर में गंभीर चोट लगी है। अस्पताल में जब उन्होंने पिता को देखा तो उनके सिर पर चार टांके लगे थे। लक्ष्य का दावा है कि उनके पिता ने बताया कि प्रदर्शन में कुछ हिंसक और उपद्रवी लोग भी शामिल थे।
CJP ने लगाए थे पुलिस कार्रवाई के आरोप
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आरोप लगाया था कि 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च और उसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और पैलेट गन का इस्तेमाल किया। पार्टी ने कई छात्रों के घायल होने का दावा करते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
राहुल गांधी ने भी उठाए थे सवाल

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी आरोप लगाया था कि संसद मार्च के दौरान छात्रों के साथ बर्बरता हुई। उन्होंने दावा किया था कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाई गई, शॉक बैटन का इस्तेमाल हुआ और कील लगी लाठियों से छात्रों को पीटा गया।
सरकार ने आरोपों को किया खारिज
केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के खिलाफ बल प्रयोग नहीं किया गया। सरकार के अनुसार, कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ की गई जिन्होंने सुरक्षा बैरिकेड तोड़ने और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने का प्रयास किया।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने छात्रों पर कथित बर्बरता के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि प्रदर्शनकारियों पर कोई गोली नहीं चलाई गई। वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की।
विवाद पर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
20 जुलाई की घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। एक ओर प्रदर्शनकारी संगठन पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगा रहे हैं, वहीं घायल पुलिसकर्मियों के परिजन कह रहे हैं कि ड्यूटी के दौरान पुलिस पर भी हिंसक हमला हुआ। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
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