Haryana contractual lecturers regularisation : हरियाणा के सरकारी कॉलेजों में वर्षों से कार्यरत अनुबंधित (Contractual) लेक्चररों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 19 June 2026
IBN24 News Network : कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कर्मचारियों को वर्षों तक नियमितीकरण के मुद्दे पर अनिश्चितता में नहीं रखा जा सकता। यदि निर्धारित समयसीमा में आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों पर व्यक्तिगत रूप से ₹50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला ?
हरियाणा के विभिन्न सरकारी कॉलेजों में कंप्यूटर साइंस, कॉमर्स और मैनेजमेंट विषयों के सैकड़ों लेक्चरर लंबे समय से अनुबंध के आधार पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कई लेक्चरर एक दशक से अधिक समय से पढ़ा रहे हैं, लेकिन उनके नियमितीकरण को लेकर सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया।

इसी देरी के खिलाफ प्रभावित लेक्चररों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि वे लगातार सेवाएं दे रहे हैं और नियमित कर्मचारियों की तरह कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा और उससे जुड़े लाभ नहीं मिल रहे हैं।
हाईकोर्ट ने क्या कहा ?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जाहिर की। अदालत ने कहा कि किसी भी कर्मचारी के नियमितीकरण से जुड़े मामलों को अनिश्चितकाल तक लंबित रखना उचित नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि:

6 महीने की समयसीमा तय

अफसरों को सख्त चेतावनी
अदालत ने अपने आदेश में साफ किया कि यदि तय समय सीमा के भीतर निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
ऐसी स्थिति में अदालत अधिकारियों पर ₹50,000 तक का व्यक्तिगत जुर्माना लगा सकती है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश प्रशासनिक लापरवाही और फाइलों को वर्षों तक लंबित रखने की प्रवृत्ति पर सख्त संदेश है।
सरकार के सामने क्या चुनौती ?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब हरियाणा उच्च शिक्षा विभाग को:
- सभी अनुबंधित लेक्चररों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा करनी होगी।
- नियमितीकरण नीति के तहत पात्रता की जांच करनी होगी।
- लंबित दावों और अभ्यावेदन पर निर्णय लेना होगा।
- निर्धारित समयसीमा के भीतर अदालत के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
लेक्चररों में खुशी का माहौल
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अनुबंधित लेक्चररों में खुशी और उम्मीद का माहौल है। उनका कहना है कि वर्षों से लंबित मुद्दे पर पहली बार अदालत ने स्पष्ट समयसीमा तय की है।
कई लेक्चररों का मानना है कि यदि सरकार अदालत के निर्देशों का पालन करती है तो लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता समाप्त हो सकती है और उन्हें नौकरी की सुरक्षा के साथ अन्य सेवा लाभ भी मिल सकते हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नियमितीकरण प्रक्रिया पूरी होती है तो इससे न केवल शिक्षकों को फायदा होगा बल्कि सरकारी कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता और स्थिरता भी बढ़ेगी। लंबे समय से कार्यरत अनुभवी शिक्षकों को स्थायी दर्जा मिलने से उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का यह फैसला हरियाणा के अनुबंधित लेक्चररों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अदालत ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि कर्मचारियों के भविष्य से जुड़े मामलों को वर्षों तक लंबित नहीं रखा जा सकता। अब सभी की नजरें राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग पर हैं कि वे छह महीने के भीतर इस दिशा में क्या निर्णय लेते हैं।
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