Middle East Crisis Impact : देश इस समय एक बड़े आर्थिक और भू-राजनीतिक दबाव के दौर से गुजर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान तनाव और सप्लाई चेन संकट के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की जनता से की गई अपील ने राजनीतिक और आर्थिक बहस को तेज कर दिया है। हैदराबाद में एक जनसभा के दौरान पीएम मोदी ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, एक साल तक सोना न खरीदने, विदेशी यात्राओं से बचने, खाना पकाने के तेल की खपत घटाने और मेट्रो व पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल करने की अपील की।

मिडिल ईस्ट युद्ध, तेल संकट और शेयर बाजार की गिरावट के बीच पीएम मोदी की अपील पर विपक्ष का हमला तेज; विदेशी मुद्रा बचाने से लेकर सोना न खरीदने तक की सलाह ने बढ़ाई आर्थिक चिंता
Written by Kajal Panchal • Published on : 11 May 2026
IBN24 News Network : प्रधानमंत्री की इस अपील को लेकर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामियों का बोझ जनता पर डाल रही है। उन्होंने लिखा कि जनता को यह बताना पड़ रहा है कि क्या खरीदें, क्या न खरीदें, कहां जाएं और कहां न जाएं। राहुल ने प्रधानमंत्री को “Compromised PM” तक कह दिया और आरोप लगाया कि सरकार जवाबदेही से बच रही है।
आज का गोल्ड रेट (11 मई 2026)
वैश्विक तनाव और मिडिल ईस्ट संकट के बीच सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं। सोमवार को भारतीय बाजार में गोल्ड के दाम इस प्रकार रहे:
- 24 कैरेट गोल्ड (10 ग्राम): लगभग ₹1,52,200 से ₹1,52,350
- 22 कैरेट गोल्ड (10 ग्राम): लगभग ₹1,39,517 से ₹1,39,650
इसी तेजी के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से अगले एक साल तक जरूरत न हो तो सोना न खरीदने की अपील की है। उनका कहना है कि भारत बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है।
“ये उपदेश नहीं, नाकामी के सबूत” – राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि 12 साल के शासन के बाद देश ऐसी स्थिति में पहुंच गया है जहां सरकार लोगों से त्याग मांग रही है। उन्होंने कहा कि हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल दी जाती है ताकि सरकार खुद जवाबदेही से बच सके। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान-अमेरिका युद्ध को तीन महीने हो चुके हैं, लेकिन सरकार ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अब भी ठोस तैयारी करती नहीं दिख रही।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि संकट से निपटने के लिए आकस्मिक योजना बनाने के बजाय आम लोगों से असुविधा सहने को कहा जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार वैश्विक संकट का बोझ सीधे जनता पर डाल रही है।
आखिर पीएम मोदी ने क्या कहा?
हैदराबाद की सभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर भारत पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि देशभक्ति सिर्फ सैनिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह देश के आर्थिक हितों का ध्यान रखे।
पीएम मोदी ने लोगों से कहा कि:

- जहां संभव हो मेट्रो, बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें
- कार पूलिंग अपनाएं
- माल ढुलाई के लिए रेलवे को प्राथमिकता दें
- इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाएं
- विदेशी छुट्टियों और डेस्टिनेशन वेडिंग से बचें
- वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग्स को फिर प्राथमिकता दें
- एक साल तक जरूरत न हो तो सोना न खरीदें
- खाने के तेल की खपत कम करें और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दें
प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और देश आर्थिक संकट से बेहतर तरीके से निपट सकेगा।
क्यों बढ़ी चिंता ?
सूत्रों के मुताबिक, ईरान युद्ध के चलते तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है।

इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अधिकारियों का दावा है कि अगर देश ईंधन की खपत में 10 प्रतिशत की कमी लाता है तो रोजाना करीब 160 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। वहीं सोना खरीद, विदेशी यात्राओं और खाद्य तेल आयात में कमी आने पर कुल बचत 500 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच सकती है।
क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम ?
प्रधानमंत्री के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें जल्द बढ़ने वाली हैं। फिलहाल सरकार सीधे तौर पर कीमत बढ़ाने से बचती दिख रही है। माना जा रहा है कि सरकार पहले जनता से स्वैच्छिक बचत चाहती है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं और वैश्विक हालात नहीं सुधरे तो सरकार को आगे चलकर ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
शेयर बाजार में हड़कंप, निवेशकों में डर

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स खुलते ही धड़ाम हो गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी शुरुआती कारोबार में करीब 275 अंक तक टूट गया। विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में डर की सबसे बड़ी वजह प्रधानमंत्री मोदी का बयान और उससे जुड़े आर्थिक संकेत हैं। निवेशकों को आशंका है कि:
- तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं
- महंगाई बढ़ेगी
- आयात बिल और व्यापार घाटा बढ़ सकता है
- रुपये पर दबाव बढ़ेगा
- उपभोक्ता खर्च में कमी आ सकती है
इन सभी कारणों ने बाजार में घबराहट बढ़ा दी है।
संकट से बचने की तैयारी या आने वाले खतरे का संकेत?
प्रधानमंत्री की अपील को लेकर अब देश में दो तरह की राय बनती दिख रही है। एक पक्ष इसे वैश्विक संकट के बीच जिम्मेदार नागरिक व्यवहार की अपील बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे सरकार की आर्थिक कमजोरी और संभावित बड़े संकट का संकेत बता रहा है। मिडिल ईस्ट युद्ध, बढ़ती तेल कीमतें, विदेशी मुद्रा पर दबाव और गिरता शेयर बाजार—इन सबके बीच आने वाले दिनों में सरकार कौन से बड़े फैसले लेती है, इस पर देश और बाजार दोनों की नजरें टिकी रहेंगी।
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