Haryana Bank Account Verification : हरियाणा में सामने आए IDFC बैंक घोटाले के बाद राज्य सरकार ने सरकारी धन की निगरानी को लेकर बड़ा कदम उठाया है। वित्त विभाग ने सरकारी निगमों, कंपनियों, बोर्डों, सहकारी संस्थाओं और स्वायत्त निकायों में बैंक खातों में जमा सरकारी फंड का हर तिमाही सत्यापन और बैंक रिकंसिलिएशन कराने के निर्देश दिए हैं।

Written by Kajal Panchal • Published on : 17 August 2026
IBN24 NEWS NETWORK : अब संबंधित संस्थाओं के प्रबंध निदेशक (MD), मुख्य प्रशासक (Chief Administrator) या मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को यह प्रमाणित करना होगा कि बैंक खातों में जमा राशि का मिलान अकाउंट बुक्स और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड से कर लिया गया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब IDFC First Bank से जुड़े मामले में करोड़ों रुपये के सरकारी फंड के कथित गबन और संदिग्ध बैंक लेनदेन की जांच चल रही है।
IDFC घोटाले में अब तक क्या हुआ ?
उपलब्ध टाइमलाइन के मुताबिक, मामले की शुरुआत सितंबर 2025 में हुई थी। इसके बाद जनवरी 2026 में खातों को बंद करने की प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ी के संकेत मिले और फरवरी में IDFC First Bank ने कथित 590 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा किया।

मामले की प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:
सितंबर 2025
सरकारी योजनाओं के लिए IDFC और AU बैंक में खाते खोले गए।
जनवरी 2026
खाते बंद करने की प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ी के संकेत मिले।
फरवरी 2026
IDFC First Bank ने 590 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा किया।
23 फरवरी 2026
हरियाणा सरकार ने दोनों बैंकों को सरकारी पैनल से हटा दिया।
फरवरी-मार्च 2026
ACB ने FIR दर्ज की, जबकि ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
अप्रैल 2026
मामला CBI को सौंप दिया गया।
मई 2026
CBI ने पहली चार्जशीट दाखिल की।
जून 2026
IAS, IFS और अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।
घोटाले में कौन-कौन जांच के दायरे में ?
मामले से जुड़ी जानकारी में कई अधिकारियों और अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार:
शिव ऋषि — IDFC First Bank के पूर्व ब्रांच मैनेजर, कथित मास्टरमाइंड।
अभय कुमार — संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन में भूमिका।
स्वाति सिंगला — धन प्राप्त करने वाली कंपनी से जुड़ी।
अभिषेक सिंगला — स्वास्तिक टच प्रोजेक्ट्स से जुड़ा आरोपी।
राजेश सांगवान — पूर्व वित्त नियंत्रक।
विक्रम वाधवा — 70 करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त करने का आरोप।
सुरेंद्र जैन — पंचकूला नगर निगम के सीनियर अकाउंट्स अफसर।
IAS आरके सिंह — पूर्व नगर निगम आयुक्त, पंचकूला।
प्रिंस शर्मा — पंचायत विभाग के सुपरिंटेंडेंट।
IAS पंकज अग्रवाल — 60 करोड़ रुपये से ज्यादा के गबन का आरोप।
नोट: ऊपर दी गई भूमिकाएं और आरोप उपलब्ध सामग्री में बताए गए हैं। किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए।
अब सरकारी बैंक खातों की हर तिमाही होगी जांच
वित्त विभाग की ओर से जारी पत्र में सरकारी संस्थाओं के बैंक खातों में जमा फंड की Quarterly Certification and Reconciliation कराने को कहा गया है।
पत्र का नंबर No./IF&CC/2026/14096 है। यह पत्र हरियाणा सरकार के Finance Department की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से जारी किया गया है।
पत्र में राज्य सरकार के निगमों, कंपनियों, बोर्डों, सहकारी संस्थाओं और हरियाणा की स्वायत्त संस्थाओं के सभी MD, Chief Administrator और CEO को संबोधित किया गया है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित संस्थाओं को दिए गए प्रोफार्मा को भरकर और संबंधित MD/Chief Administrator/CEO के हस्ताक्षर के बाद हर तिमाही जमा करना होगा।
प्रमाणित प्रोफार्मा वित्त विभाग द्वारा नामित संस्था के संबंधित अधिकारी को भेजना होगा और इसकी समय पर तथा नियमित प्रस्तुति सुनिश्चित करनी होगी।
क्या-क्या प्रमाणित करना होगा ?
नई व्यवस्था के तहत केवल बैंक बैलेंस देखना पर्याप्त नहीं होगा। बैंक खातों, अकाउंट बुक्स, ब्याज, BRS और ऑडिट से जुड़े रिकॉर्ड का भी मिलान करना होगा।
1. बैंक खातों में जमा फंड का मिलान
बैंक खातों में जमा सरकारी फंड का अकाउंट बुक्स से मिलान करना होगा।
2. सभी प्रकार के बैंक खातों की समीक्षा
सभी सेविंग, करंट, टर्म डिपॉजिट और फ्लेक्सी खातों की समीक्षा करनी होगी।
3. वित्त विभाग के नियमों के अनुसार संचालन
यह भी प्रमाणित करना होगा कि बैंक खातों का संचालन वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है।
4. ब्याज की जांच
निवेश या FDR पर मिले ब्याज की सही क्रेडिट संबंधित बैंक खाते में हुई है या नहीं, इसकी भी जांच होगी।
5. BRS का मिलान
Bank Reconciliation Statement (BRS) का मिलान संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड से करना होगा।
6. ऑडिट में गड़बड़ी की स्थिति
Statutory Audit और Internal Audit में किसी गड़बड़ी या अनियमितता की स्थिति की भी पुष्टि करनी होगी।
BRS और अकाउंट बुक्स का होगा मिलान
वित्त विभाग की नई व्यवस्था में Bank Reconciliation Statement (BRS) को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है।
BRS में दिखाई गई शेष राशि का मिलान संस्था की अकाउंट बुक्स, बैलेंस शीट और बैंक रिकॉर्ड से किया जाएगा। इससे बैंक रिकॉर्ड और संस्था के अपने वित्तीय रिकॉर्ड के बीच किसी भी अंतर का पता लगाया जा सकेगा।
यदि किसी खाते में अंतर दिखाई देता है तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय उसकी पहचान और समाधान जरूरी होगा।
ऑडिट रिपोर्ट भी बनेगी प्रमाणन का हिस्सा
संबंधित MD/CEO को यह भी प्रमाणित करना होगा कि संस्था की Statutory Audit और Internal Audit में सामने आई वित्तीय स्थिति संतोषजनक है।
यदि ऑडिट के दौरान किसी वित्तीय अनियमितता, गड़बड़ी या रिकॉर्ड में अंतर की जानकारी सामने नहीं आई है तो इसकी भी पुष्टि प्रमाण-पत्र में करनी होगी।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक खातों का रिकॉर्ड केवल कागजों पर सही न हो, बल्कि संस्था के ऑडिट और वित्तीय दस्तावेजों से भी उसका मिलान हो।
बैंकिंग घोटाले के बाद क्यों बढ़ी सख्ती ?
IDFC मामले में सरकारी फंड से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित घोटाले ने सरकारी संस्थाओं के बैंक खातों की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। पहले जहां बैंक खातों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच निर्धारित ऑडिट प्रक्रिया के तहत होती थी, अब नई व्यवस्था में हर तिमाही प्रमाणित सत्यापन की व्यवस्था की गई है। इससे बैंक खाते में मौजूद रकम, अकाउंट बुक्स, FDR, ब्याज, BRS और ऑडिट रिकॉर्ड को नियमित अंतराल पर एक-दूसरे से मिलाने की व्यवस्था होगी।
वित्त विभाग को समय पर देनी होगी रिपोर्ट
वित्त विभाग ने सभी संबंधित संस्थाओं को निर्देश दिया है कि निर्धारित प्रोफार्मा को हर तिमाही पूरा करके वित्त विभाग द्वारा नामित अधिकारी को भेजा जाए। MD, Chief Administrator या CEO के हस्ताक्षर वाला यह प्रमाण-पत्र इस बात की पुष्टि करेगा कि संस्था ने बैंक में जमा फंड का सत्यापन और रिकंसिलिएशन कर लिया है। विभाग ने साफ तौर पर समय पर और नियमित रूप से प्रोफार्मा जमा कराने को कहा है।
क्या बदलेगा ?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकारी संस्थाओं को बैंक खातों के संबंध में अधिक जवाबदेही रखनी होगी। हर तिमाही:
- सरकारी फंड का बैंक बैलेंस से मिलान होगा।
- अकाउंट बुक्स और बैंक रिकॉर्ड की जांच होगी।
- सेविंग, करंट, टर्म डिपॉजिट और फ्लेक्सी खातों की समीक्षा होगी।
- FDR और निवेश पर मिलने वाले ब्याज की जांच होगी।
- BRS का मिलान किया जाएगा।
- Statutory और Internal Audit की स्थिति देखी जाएगी।
- MD/CEO स्तर पर प्रमाण-पत्र जारी होगा।
- प्रमाण-पत्र वित्त विभाग द्वारा नामित अधिकारी को भेजना होगा।
Please also read this article :
Instagram: https://www.instagram.com/ib




















