Haryana Electricity Consumers FSA Relief : हरियाणा के करीब 84 लाख बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। हरियाणा बिजली विनियामक आयोग (HERC) ने बिजली वितरण निगमों की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उपभोक्ताओं से फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट (FSA) के नाम पर ₹1,134.54 करोड़ की वसूली की अनुमति मांगी गई थी।

Written by Kajal Panchal • Published on : 1 October 2026
IBN24 NEWS NETWORK : इस फैसले के बाद संबंधित FSA राशि को उपभोक्ताओं से बिजली बिल के जरिए दोबारा वसूल नहीं किया जा सकेगा। यह मामला उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला ?
बिजली निगमों की ओर से नवंबर 2025 में ₹1,134.54 करोड़ की FSA राशि की वसूली का प्रयास किया गया था। हालांकि, यह राशि निर्धारित समय-सीमा के भीतर उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में शामिल नहीं की गई।

मामले की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा कि नियमों के तहत FSA की राशि को निर्धारित समय के भीतर ही उपभोक्ताओं से वसूल किया जा सकता है। जानकारी के अनुसार, संबंधित राशि वित्त वर्ष 2022-23 से जुड़ी थी और अधिकतम दो वर्ष के भीतर इसकी वसूली की जानी थी।
इसके बाद जनवरी 2026 में निर्धारित समय-सीमा के कारण यह राशि नियमों के अनुसार जब्त हो गई थी।
HERC ने बिजली निगमों की याचिका क्यों खारिज की ?
बिजली निगमों ने आयोग के सामने इस राशि की दोबारा वसूली की अनुमति मांगी थी। हालांकि, HERC ने उनकी याचिका को स्वीकार नहीं किया।

इस फैसले का सीधा असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिनसे प्रस्तावित FSA राशि की वसूली की जानी थी। यानी ₹1,134.54 करोड़ की यह राशि अब इस याचिका के तहत उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में दोबारा नहीं जोड़ी जाएगी।
करीब ₹950 करोड़ सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ी देनदारी
सुनवाई के दौरान बिजली निगमों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि नवंबर 2025 में मांगी गई ₹1,134.54 करोड़ की राशि में से करीब ₹950.09 करोड़ यानी लगभग 84 प्रतिशत राशि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से उत्पन्न देनदारी से संबंधित थी।
इसमें पिछले वित्त वर्षों के ट्रांसमिशन शुल्क, विलंब भुगतान अधिभार और अतिरिक्त बिलिंग से संबंधित राशि शामिल होने की बात सामने आई।
प्रो. संपत सिंह ने किया था याचिका का विरोध
पूर्व मंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने HERC में सुनवाई के दौरान बिजली निगमों की याचिका का विरोध किया था।
उनका तर्क था कि बिजली कंपनियां निर्धारित नियमों और समय-सीमा का पालन किए बिना उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाल सकतीं। उन्होंने कहा कि यदि बिजली निगमों की ओर से किसी तरह की देरी या प्रशासनिक लापरवाही हुई है तो उसका आर्थिक बोझ आम बिजली उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए।
2021 से जुड़े FSA को लेकर भी उठाया मुद्दा
प्रो. संपत सिंह ने यह भी कहा कि कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर बिजली निगमों से जवाब मांगा जाना बाकी है। उनके अनुसार, वर्ष 2021 से उपभोक्ताओं को मिलने वाले कई नकारात्मक फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट का लाभ नहीं दिया गया है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं से जुड़े इन मुद्दों को आगामी वित्त वर्ष 2027-28 की अनुमानित वार्षिक राजस्व प्राप्तियों की सुनवाई के दौरान भी उठाया जाएगा।
बिजली बिल पर क्या होगा असर ?
HERC के इस फैसले के बाद संबंधित ₹1,134.54 करोड़ की FSA राशि की प्रस्तावित वसूली नहीं हो पाएगी। इससे इस मामले के दायरे में आने वाले उपभोक्ताओं को अतिरिक्त FSA भुगतान से राहत मिलेगी।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हरियाणा में बिजली के सभी शुल्क या भविष्य के FSA पूरी तरह समाप्त कर दिए गए हैं। यह फैसला विशेष रूप से उस FSA वसूली याचिका से संबंधित है, जिसे HERC ने खारिज किया है।
आगे किन मुद्दों पर होगी सुनवाई ?
प्रो. संपत सिंह के अनुसार, आने वाली सुनवाई में फिक्स्ड चार्ज, बिजली दरों और नगर निकायों के टैक्स से जुड़े मुद्दे भी उठाए जाएंगे। उनका कहना है कि इन शुल्कों से घरों और छोटे कारोबारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ पर भी चर्चा की जाएगी।
इस तरह HERC का यह फैसला हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ₹1,134.54 करोड़ की प्रस्तावित FSA वसूली को आयोग ने मंजूरी नहीं दी है।
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