Haryana ₹700 Crore Fraud : हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट सोसायटी से जुड़े 700 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में सेक्टर-35 के बर्तन कारोबारी गौरव कांसल, सिद्धार्थ नरूला, मोहित और मनोज शामिल हैं। सभी को पंचकूला स्थित CBI अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की रिमांड पर भेज दिया गया।

Written by Kajal Panchal • Published on : 13 October 2026
IBN24 NEWS NETWORK : जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में सरकारी खातों से निकाली गई रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर कैश में बदलने और कथित तौर पर उसे अलग-अलग लोगों तक पहुंचाने का नेटवर्क काम कर रहा था। अब CBI यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी धन किन लोगों तक पहुंचा और उससे कहां-कहां संपत्तियां खरीदी गईं।
गौरव कांसल पर ₹94 करोड़ के लेन-देन में भूमिका निभाने का आरोप
CBI के मुताबिक, कारोबारी गौरव कांसल ने सरकारी खातों से निकाली गई रकम को कैश में बदलने और फिर उसे बैंक खातों में जमा कराने में अहम भूमिका निभाई। एजेंसी का आरोप है कि उसने IDFC फर्स्ट बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर और मामले के कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि के साथ मिलकर करीब 94 करोड़ रुपये की रकम को ठिकाने लगाने में मदद की।
जांच के अनुसार, गौरव ने 140 से अधिक लेन-देन के जरिए सरकारी धन को अलग-अलग माध्यमों से स्थानांतरित किया। इसके बाद रकम कैश कन्वर्टर्स तक पहुंचाई गई। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। गौरव के एक चचेरे भाई की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई है।
फर्जी कंपनियों के खातों से करोड़ों रुपये का लेन-देन
CBI के अनुसार, 6 दिसंबर 2023 से 5 दिसंबर 2025 के बीच कथित फर्जी कंपनियों RS Traders, Capco Fintech Services और Swastik Desh Projects के खातों से Bharat Distributors के खाते में 82 लेन-देन के जरिए 26.78 करोड़ रुपये भेजे गए। इसके बदले 66 लेन-देन के माध्यम से 25.18 करोड़ रुपये वापस भेजे गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन बैंक लेन-देन के साथ कैश का भी इस्तेमाल किया गया।

जांच में सामने आए कथित तरीके के अनुसार, सरकारी खातों से निकाली गई रकम को सीधे खर्च करने के बजाय कई बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता था। इसके बाद रकम को कैश में बदलने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी, ताकि धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थियों का पता लगाना मुश्किल हो जाए। CBI के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क का संचालन रिभव ऋषि के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित कार्यालय से किया जाता था।
नगर परिषद कालका के खाते से ₹18.46 करोड़ निकलने का मामला
इस मामले में नगर परिषद कालका के खाते से 18.46 करोड़ रुपये निकाले जाने का मामला भी जांच का प्रमुख हिस्सा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 20 जनवरी 2026 को इस रकम में से 4 करोड़ रुपये SRR Planning Gurus के RBL बैंक खाते में भेजे गए। इसके बाद उसी दिन 2.50 करोड़ रुपये Chandigarh Mega Store के खाते में स्थानांतरित किए गए। इसके बाद 21 और 22 जनवरी को Swastik Desh Projects के माध्यम से 80 लाख रुपये और 1.10 करोड़ रुपये के अतिरिक्त लेन-देन किए गए।
CBI के आरोपों के मुताबिक, 22 जनवरी को रिभव ऋषि के कहने पर मोहित गोयल ने अपने स्टोर और परिचितों के माध्यम से 2 करोड़ रुपये कैश का इंतजाम किया। एजेंसी का दावा है कि इसी रकम को उसी शाम हवाला नेटवर्क के जरिए दिल्ली में आरोपी IAS अधिकारी आरके सिंह के बेटे तक पहुंचाया गया। यह आरोप जांच का हिस्सा हैं। इस मामले में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कथित लेन-देन की पूरी कड़ी की पुष्टि जांच के निष्कर्षों तथा न्यायिक प्रक्रिया से होगी।
चंडीगढ़ मेगा स्टोर के खाते में आए ₹59.50 करोड़
मामले में गिरफ्तार आरोपियों में चंडीगढ़ मेगा स्टोर के मालिक मोहित गोयल भी शामिल हैं। उनका स्टोर सेक्टर-32डी के SCO-357 में संचालित बताया गया है। CBI के मुताबिक, मोहित गोयल को जानकारी थी कि RS Traders और Capco Fintech Services का संबंध रिभव ऋषि से है। एजेंसी के अनुसार, IDFC फर्स्ट बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि ने ही मोहित गोयल के स्टोर का बैंक खाता खुलवाया था।

जांच एजेंसी का दावा है कि 11 अक्टूबर 2023 से 28 जनवरी 2026 के बीच RS Traders, Capco Fintech, Swastik Desh और SRR Planning Gurus ने मोहित गोयल तथा उनकी दो फर्मों Chandigarh Mega Store और Bhagwati Agencies को 112 लेन-देन में कुल 59 करोड़ 50 लाख 47 हजार 515 रुपये भेजे। इसके बदले इन खातों से 14 करोड़ 5 लाख 24 हजार रुपये वापस भेजे गए। CBI इन लेन-देन के उद्देश्य, रकम के अंतिम इस्तेमाल और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है।
सरकारी धन की हेराफेरी का नेटवर्क खंगाल रही CBI
700 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी के इस मामले में जांच एजेंसी बैंक खातों, फर्मों के बीच हुए लेन-देन और कैश तथा हवाला के कथित इस्तेमाल की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
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