Haryana Electricity Employees Strike : हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह में बिजली सप्लाई के लिए निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को लाइसेंस देने के फैसले पर विवाद बढ़ता जा रहा है। बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने इस फैसले के विरोध में 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है। वहीं, ऊर्जा मंत्री अनिल विज की ओर से बुधवार दोपहर 3 बजे बुलाई गई वार्ता में शामिल होने से संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने इनकार कर दिया है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 21 October 2026
IBN24 NEWS NETWORK : मोर्चा ने शक्ति भवन स्थित HVPNL के चीफ इंजीनियर/एडमिन को पत्र भेजकर बैठक में शामिल न हो पाने की जानकारी दी। संगठन का कहना है कि बैठक के लिए बहुत कम समय दिया गया। इसके अलावा, कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी अस्वस्थ हैं, जबकि अन्य पदाधिकारियों की पहले से जरूरी व्यस्तताएं तय हैं। ऐसे में सर्वसम्मति से बैठक में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया गया।
निजी बिजली कंपनी को लाइसेंस देने का विरोध क्यों ?
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले का विरोध कर रहा है। दो दिन पहले हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को लाइसेंस जारी किया था। इसके बाद से बिजली कर्मचारी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

संयुक्त मोर्चा का आरोप है कि प्रदेश के सबसे अधिक राजस्व देने वाले क्षेत्रों को निजी कंपनी के हवाले करने से सरकारी बिजली निगम दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) को नुकसान हो सकता है। संगठन ने इस फैसले को जनविरोधी और कर्मचारी विरोधी बताते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है। मोर्चा को आशंका है कि यदि गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण की अनुमति दी जाती है, तो भविष्य में दूसरे जिलों में भी निजीकरण का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, ये संगठन की आशंकाएं और आरोप हैं।
25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस
इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए लाइसेंस दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कंपनी की योजना आधुनिक बिजली नेटवर्क विकसित करने की है। प्रस्ताव में 33 केवी आधारित वितरण नेटवर्क, गैस इंसुलेटेड सब-स्टेशन और भूमिगत केबलिंग जैसी तकनीकों को शामिल किया गया है।

कंपनी की ओर से प्रस्तावित तकनीकी ढांचे का उद्देश्य बिजली वितरण की क्षमता बढ़ाना, तकनीकी खराबियों को कम करना और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाना बताया गया है। हालांकि, बिजली कर्मचारी संगठन इस मॉडल को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि निजी कंपनी को समानांतर वितरण लाइसेंस देने से सरकारी बिजली निगम की आर्थिक स्थिति और कर्मचारियों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।
HERC और विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद मिला लाइसेंस
लाइसेंस जारी करने से पहले मामले की समीक्षा पूर्व आईएएस अधिकारी आलोक निगम की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति ने की थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समीक्षा में कंपनी की पूंजी पर्याप्तता, क्रेडिट वर्थनेस और संबंधित वैधानिक शर्तों का आकलन किया गया। इसके बाद HERC ने लाइसेंस जारी किया। आयोग के इस फैसले के बाद निजी बिजली वितरण व्यवस्था को लेकर प्रदेश में राजनीतिक और कर्मचारी स्तर पर बहस तेज हो गई है।

कंपनी ने आधुनिक तकनीक के जरिए बिजली वितरण नेटवर्क विकसित करने की योजना रखी है। इसमें 33 केवी नेटवर्क, कम जगह घेरने वाले GIS सब-स्टेशन और भूमिगत केबलिंग जैसे प्रावधान शामिल हैं। इन तकनीकों से बिजली आपूर्ति में सुधार कितना होगा, यह परियोजना लागू होने और उसके प्रदर्शन के बाद स्पष्ट होगा।
चार यूनियनों ने वार्ता से दूरी बनाई
बिजली कर्मचारियों के साझा संघर्ष मोर्चा में विभिन्न कर्मचारी और इंजीनियर संगठन शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मोर्चे से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों में हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन, AHPC वर्कर यूनियन, HSEB वर्कर यूनियन और HPC SC/ST & BC एम्प्लॉइज यूनियन के प्रतिनिधि शामिल हैं।
संगठन का कहना है कि सरकार की ओर से वार्ता के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। साथ ही, कुछ पदाधिकारियों की बीमारी और अन्य जरूरी व्यस्तताओं के कारण बैठक में भाग लेना संभव नहीं था। मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि बिजली क्षेत्र के सार्वजनिक हित, प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति और हजारों कर्मचारियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार को उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 22, 23 और 24 अक्टूबर को तीन दिन की पूर्ण हड़ताल का कार्यक्रम घोषित किया है। संगठन निजी बिजली वितरण लाइसेंस के फैसले का विरोध करते हुए सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहा है।
हड़ताल के दौरान बिजली सेवाओं पर संभावित असर को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ सकती है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव कर्मचारियों की भागीदारी, आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था और विभाग की वैकल्पिक तैयारियों पर निर्भर करेगा।
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