NCERT Judiciary Chapter Controversy : Supreme Court of India ने NCERT की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका पर आधारित विवादित चैप्टर को लेकर अपने पुराने आदेश में बड़ा बदलाव किया है। कोर्ट ने उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें चैप्टर तैयार करने वाले तीन शिक्षाविदों को केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों सहित सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों की अकादमिक गतिविधियों से अलग रखने का निर्देश दिया गया था।

Written by Kajal Panchal • Published on : 22 May 2026
IBN24 News Network : साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में की गई अपनी कठोर टिप्पणी भी रिकॉर्ड से हटाने का फैसला लिया है। उस समय कोर्ट ने कहा था कि शिक्षाविदों ने जानबूझकर छात्रों के सामने भारतीय न्यायपालिका की नकारात्मक छवि पेश करने की कोशिश की थी।
कोर्ट ने कहा- अब सरकार स्वतंत्र फैसला ले
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant, जस्टिस Joymalya Bagchi और जस्टिस Vipul Pancholi की बेंच ने कहा कि शिक्षाविदों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को देखते हुए पुराने आदेश में बदलाव जरूरी है।

कोर्ट ने अपने नए आदेश में कहा कि संबंधित अध्याय “पूरी तरह अवांछनीय” था, लेकिन शिक्षाविदों को अकादमिक गतिविधियों से दूर रखने वाला निर्देश वापस लिया जाता है। अब केंद्र और राज्य सरकारें या अन्य संस्थाएं स्वतंत्र रूप से तय कर सकती हैं कि उन्हें भविष्य की परियोजनाओं में शामिल करना है या नहीं।
किन शिक्षाविदों को मिली राहत ?
इस मामले में प्रोफेसर Michel Danino, Suparna Diwakar और Alok Prasanna Kumar ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देकर पुराने आदेश को वापस लेने की मांग की थी। उनका कहना था कि मार्च में आदेश पारित करते समय अदालत ने उनका पक्ष नहीं सुना था।
शिक्षाविदों की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने अदालत को बताया कि यह किसी एक व्यक्ति का लिखा हुआ अध्याय नहीं था, बल्कि सामूहिक अकादमिक प्रक्रिया के तहत तैयार किया गया था।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं ?
वरिष्ठ अधिवक्ता Shyam Divan ने कहा कि कोर्ट के पुराने आदेश के दूरगामी असर हो सकते हैं और इससे शिक्षाविदों के पेशेवर जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता Gopal Sankaranarayanan ने दलील दी कि न्यायपालिका से जुड़े मुद्दों पर देशभर में खुली चर्चा होती है, इसलिए छात्रों को भी वास्तविक परिस्थितियों की जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल संस्थाओं की सकारात्मक तस्वीर दिखाना नहीं, बल्कि व्यवस्था की चुनौतियों को समझाना भी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता J Sai Deepak ने कहा कि Suparna Diwakar की भूमिका सीमित थी और अदालत का आदेश उनके रोजगार के अधिकार को प्रभावित कर सकता है।
केंद्र सरकार ने क्या कहा ?

क्या था पूरा विवाद ?
विवाद NCERT की कक्षा 8 की उस किताब से जुड़ा है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और न्यायिक देरी जैसे मुद्दों पर आधारित अध्याय शामिल था। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में स्वत: संज्ञान लेते हुए इस चैप्टर वाली किताबों पर रोक लगा दी थी और इसे हटाने का आदेश दिया था।
मार्च में कोर्ट ने कहा था कि अध्याय छात्रों के सामने न्यायपालिका की गलत और नकारात्मक तस्वीर पेश करता है। इसके बाद चैप्टर तैयार करने वाले शिक्षाविदों को सरकारी और सार्वजनिक शैक्षणिक परियोजनाओं से दूर रखने का निर्देश दिया गया था।
शिक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई बहस
इस फैसले के बाद एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था, अकादमिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की सीमा को लेकर बहस तेज हो गई है। एक पक्ष का मानना है कि छात्रों को संस्थाओं की वास्तविक चुनौतियों से अवगत कराना जरूरी है, जबकि दूसरा पक्ष कहता है कि स्कूली शिक्षा में न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं की नकारात्मक छवि पेश नहीं की जानी चाहिए।
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