Dabur Gets Relief From Delhi High Court : डाबर इंडिया को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें कुछ प्रोडक्ट्स की बिक्री तुरंत बंद करने को कहा गया था। ये वे प्रोडक्ट्स हैं, जिनके लेबल पर “100% प्योर”, “100% नेचुरल” और “100% ऑर्गेनिक” जैसे दावे लिखे गए हैं। फिलहाल डाबर अपने इन उत्पादों की बिक्री जारी रख सकेगी। वहीं, कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI से इस मामले में जवाब भी मांगा है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 7 August 2026
IBN24 NEWS NETWORK : जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए FSSAI के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। इसका मतलब है कि अगली सुनवाई तक डाबर के संबंधित उत्पाद बाजार में बिकते रहेंगे। साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
किन प्रोडक्ट्स पर लगा था प्रतिबंध ?
FSSAI की कार्रवाई उन उत्पादों पर थी, जिनके लेबल पर “100% Pure”, “100% Natural” या “100% Organic” लिखा गया है।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- डाबर हनी
- डाबर हनी स्क्वीजी
- डाबर सुंदरबंस हनी
- डाबर हिमालयन एप्पल साइडर विनेगर
- डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल
- डाबर काउ घी
- रियल एक्टिव 100% टेंडर कोकोनट वॉटर
- डाबर होममेड कोकोनट मिल्क
- डाबर ऑर्गेनिक हनी
FSSAI को किस बात पर आपत्ति है ?
FSSAI का कहना है कि “100%” जैसे शब्द उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं। नियामक के अनुसार, ऐसे दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना आसान नहीं है। इसलिए इनका इस्तेमाल नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। हालांकि, FSSAI ने अपने आदेश में कहीं भी यह नहीं कहा कि संबंधित उत्पाद असुरक्षित, मिलावटी या खराब गुणवत्ता के हैं। यानी विवाद केवल लेबलिंग और विज्ञापन में इस्तेमाल किए गए शब्दों को लेकर है।
डाबर ने कोर्ट में क्या दलील दी ?

डाबर ने कहा कि FSSAI ने कार्रवाई से पहले तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया। कंपनी का दावा है कि उसे न तो शो-कॉज नोटिस दिया गया और न ही सुधार का मौका मिला। इसके अलावा, कंपनी ने कहा कि बिना स्पष्टीकरण मांगे सीधे बिक्री रोकने का आदेश जारी कर दिया गया। डाबर का यह भी कहना है कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 18 केवल मार्गदर्शक सिद्धांत तय करती है। यह किसी अधिकारी को सीधे बिक्री रोकने का अधिकार नहीं देती।
‘100% प्योर’ को लेकर डाबर का क्या तर्क है ?
कंपनी का कहना है कि यदि कोई उत्पाद पूरी तरह एक प्राकृतिक सामग्री से बना है, तो उसके लिए “100% प्योर” या “100% नेचुरल” जैसे शब्दों का इस्तेमाल अपने आप में गलत नहीं माना जा सकता। डाबर का यह भी दावा है कि FSSAI के आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इन शब्दों से कौन-सा नियम टूटता है।
क्या प्रोडक्ट्स की सेफ्टी पर सवाल है ?
नहीं। यह मामला उत्पादों की गुणवत्ता या सुरक्षा से जुड़ा नहीं है। डाबर ने कोर्ट में कहा कि FSSAI ने कहीं भी यह नहीं बताया कि उसके उत्पाद नकली, मिलावटी या स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित हैं। इसलिए पूरा विवाद केवल पैकेजिंग और लेबल पर लिखे गए दावों तक सीमित है।
अगर बैन लागू हो जाता तो क्या होता ?
यदि FSSAI का आदेश लागू रहता, तो डाबर को बाजार से अपना स्टॉक वापस मंगाना पड़ सकता था। इसके अलावा, कंपनी को कई उत्पादों की री-पैकेजिंग भी करनी पड़ती। वहीं, ऑनलाइन और ऑफलाइन विक्रेताओं को भी इन उत्पादों की बिक्री रोकनी पड़ती। इससे कंपनी के कारोबार और ब्रांड इमेज पर असर पड़ सकता था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद क्या बदला ?

अब डाबर अपने प्रभावित उत्पादों की बिक्री पहले की तरह जारी रख सकेगी। साथ ही, कंपनी को फिलहाल स्टॉक वापस लेने या नई पैकेजिंग करने की जरूरत नहीं होगी। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के रिटेलर्स भी इन उत्पादों की बिक्री जारी रख सकते हैं।
आगे क्या होगा ?
अब FSSAI और केंद्र सरकार हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी। फिर यह तय होगा कि 3 अगस्त को जारी FSSAI का आदेश कानून के अनुरूप था या नहीं। तब तक हाईकोर्ट की अंतरिम राहत लागू रहेगी।
FMCG कंपनियों और ग्राहकों के लिए क्यों अहम है यह मामला ?
यह मामला सिर्फ डाबर तक सीमित नहीं है। इसका असर पूरे FMCG सेक्टर पर पड़ सकता है। दरअसल, कई कंपनियां अपने उत्पादों पर “100% प्योर”, “नेचुरल” और “ऑर्गेनिक” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करती हैं। ऐसे में अदालत का अंतिम फैसला भविष्य की लेबलिंग और विज्ञापन नीति को भी प्रभावित कर सकता है। वहीं, ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि फिलहाल विवाद उत्पादों की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि उनके लेबल पर लिखे गए दावों का है।
FSSAI के नियम क्या कहते हैं ?
फूड सेफ्टी नियमों के अनुसार, यदि किसी उत्पाद के विज्ञापन या लेबल पर आपत्ति होती है, तो पहले संबंधित कंपनी को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब देने का अवसर दिया जाता है।
इसके अलावा, FSSAI का मानना है कि मल्टी-इन्ग्रीडिएंट या प्रोसेस्ड फूड पर “100% Pure” जैसे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं। वहीं, कंपनियों का तर्क है कि शहद या नारियल पानी जैसे प्राकृतिक उत्पादों के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल उचित हो सकता है।
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