Instagram Fake Copyright Strike : इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ओरिजिनल कंटेंट बनाने वाले डिजिटल क्रिएटर्स के लिए एक बड़ा खतरा सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोग मेटा (Meta) के कॉपीराइट सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर असली क्रिएटर्स के वीडियो हटवा रहे हैं।

Written by Kajal Panchal • Published on : 16 July 2026
IBN24 News Network : फेसबुक के एडिट फीचर के जरिए पोस्ट को बैकडेट दिखाकर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक भेजी जा रही है, जिससे कई क्रिएटर्स के अकाउंट और कंटेंट पर खतरा मंडरा रहा है। इसी मामले को लेकर फाइनेंशियल एजुकेटर पुष्कर राज ठाकुर और डिजिटल क्रिएटर नीरज जोशी ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
क्या है पूरा मामला ?
याचिकाओं में दावा किया गया है कि कुछ अज्ञात लोग पहले फेसबुक पर किसी पुराने या असंबंधित कंटेंट को अपलोड करते हैं। इसके बाद फेसबुक के Edit Post फीचर का उपयोग कर पोस्ट को इस तरह संशोधित किया जाता है कि वह पहले से प्रकाशित कंटेंट जैसा दिखाई देने लगे।
बाद में उसी कंटेंट के आधार पर इंस्टाग्राम पर मौजूद ओरिजिनल वीडियो के खिलाफ कॉपीराइट क्लेम भेजे जाते हैं। मेटा का ऑटोमेटेड सिस्टम बिना पर्याप्त जांच के शिकायतों पर कार्रवाई कर देता है, जिससे असली क्रिएटर्स के वीडियो हटाए जा रहे हैं और उनके अकाउंट पर कॉपीराइट स्ट्राइक दर्ज हो रही है।
मेटा के ऑटोमेटेड सिस्टम पर सवाल

क्रिएटर्स का कहना है कि मेटा का कॉपीराइट सिस्टम शिकायतों पर कार्रवाई करने से पहले कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच नहीं करता। इनमें शामिल हैं—
- वीडियो का वास्तविक मालिक कौन है।
- कंटेंट का मेटाडेटा।
- पोस्ट की एडिट हिस्ट्री।
- वास्तविक अपलोड की तारीख और समय।
- पब्लिशिंग की सही क्रोनोलॉजी।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन कमियों का फायदा उठाकर जालसाज ओरिजिनल कंटेंट बनाने वालों को निशाना बना रहे हैं।
पुष्कर राज ठाकुर ने लगाए गंभीर आरोप
पुष्कर राज ठाकुर का कहना है कि फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक की वजह से उनके कई वीडियो हटा दिए गए, कुछ को डिसेबल कर दिया गया और कई वीडियो की पहुंच सीमित कर दी गई।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मेटा ने उन्हें अपने Rights Manager टूल का एक्सेस देने से इनकार कर दिया, जबकि कथित तौर पर इसी टूल का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ लगातार फर्जी कॉपीराइट शिकायतें भेजी जाती रहीं।

नीरज जोशी के मामले में कोर्ट का आदेश
9 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने मेटा के उस बयान को रिकॉर्ड किया जिसमें कंपनी ने कहा कि यदि नीरज जोशी का इंस्टाग्राम अकाउंट स्थायी रूप से बंद नहीं हुआ है, तो वह शिकायतों की जांच करेगी और उनके वेरिफाइड अकाउंट की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
कोर्ट ने मेटा को तीन सप्ताह के भीतर संबंधित Basic Subscriber Information (BSI) और IP Logs उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया है, ताकि कथित आरोपियों की पहचान की जा सके।
मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी।
पुष्कर राज ठाकुर के केस में क्या हुआ ?
29 मई को हुई सुनवाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने मेटा से पूछा कि उसने प्लेटफॉर्म के इस कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं।
इसके बाद 1 जुलाई की सुनवाई में मेटा ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि—
- अगली सुनवाई तक पुष्कर राज ठाकुर के वीडियो कॉपीराइट स्ट्राइक के आधार पर नहीं हटाए जाएंगे।
- बार-बार स्ट्राइक आने की वजह से उनका अकाउंट बंद नहीं किया जाएगा।
- हटाए गए वीडियो के URL उपलब्ध कराने पर उन्हें दोबारा बहाल किया जाएगा।
इस मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को निर्धारित की गई है।
₹2 करोड़ के मुआवजे की मांग
पुष्कर राज ठाकुर ने कोर्ट से मांग की है कि मेटा को उनके ओरिजिनल कंटेंट को फर्जी और बैकडेटेड कॉपीराइट दावों के आधार पर हटाने से रोका जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि मेटा अपने Rights Manager सिस्टम में—
- KYC आधारित सत्यापन,
- टाइमस्टैम्प सुरक्षा,
- मेटाडेटा वेरिफिकेशन,
- एंटी-मैनिपुलेशन प्रोटोकॉल
जैसे सुरक्षा उपाय लागू करे।
इसके अलावा उन्होंने फॉलोअर्स कम होने, मोनेटाइजेशन में नुकसान, स्पॉन्सरशिप प्रभावित होने और प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के लिए करीब ₹2 करोड़ के हर्जाने की मांग की है।
क्या है Rights Manager ?

Rights Manager मेटा का एक विशेष टूल है, जिसके जरिए बड़े क्रिएटर्स और पब्लिशर्स अपने वीडियो और ऑडियो कंटेंट के कॉपीराइट की निगरानी और सुरक्षा कर सकते हैं।
क्या होती है Copyright Strike ?

यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे का कॉपीराइटेड कंटेंट बिना अनुमति के अपलोड करता है, तो शिकायत मिलने पर मेटा उस कंटेंट को हटा सकता है और संबंधित अकाउंट पर कॉपीराइट स्ट्राइक दर्ज कर सकता है। बार-बार स्ट्राइक मिलने पर अकाउंट अस्थायी या स्थायी रूप से सस्पेंड भी किया जा सकता है।
डिजिटल क्रिएटर्स के लिए बढ़ी चिंता
इस मामले ने सोशल मीडिया पर ओरिजिनल कंटेंट बनाने वाले लाखों क्रिएटर्स की चिंता बढ़ा दी है। जिन कॉपीराइट टूल्स को कंटेंट की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, उनके कथित दुरुपयोग से अब असली क्रिएटर्स को ही नुकसान होने का खतरा पैदा हो गया है। इस मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी लंबित है।
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