Sonam Wangchuk : लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल मंगलवार को 17वें दिन भी जारी रही। लगातार अनशन के कारण उनकी सेहत बिगड़ती जा रही है। बताया जा रहा है कि उनका वजन 8.5 किलोग्राम तक कम हो चुका है। अनशन शुरू होने के समय उनका वजन 67 किलोग्राम था।

Written by Kajal Panchal • Published on : 14 July 2026
IBN24 News Network : वांगचुक 28 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका आंदोलन NEET पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी है।
सरकार से बातचीत की मांग तेज

वांगचुक के समर्थन में बनी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आरोप है कि सरकार आंदोलन को लेकर गंभीर नहीं है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि लगातार अनशन के कारण वांगचुक की हालत चिंताजनक होती जा रही है और सरकार को जल्द बातचीत शुरू करनी चाहिए।
दीपके के अनुसार, उन्होंने भी वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की, लेकिन वांगचुक का जवाब था कि उनसे नहीं, बल्कि सरकार से पूछा जाए कि वह बातचीत क्यों नहीं कर रही।
नेताओं और फिल्मी हस्तियों ने की अनशन खत्म करने की अपील
वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए कई राजनीतिक नेताओं और फिल्मी हस्तियों ने उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की है।
- सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार युवाओं की आवाज सुनने को तैयार नहीं है और वांगचुक का जीवन अधिक महत्वपूर्ण है। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की कि वह 16 जुलाई को जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक और प्रदर्शनकारियों से मुलाकात करेंगे। शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आंदोलन को समर्थन देते हुए वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की।
आंदोलन क्यों कर रहे हैं सोनम वांगचुक ?
सोनम वांगचुक का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, रिजल्ट में देरी और भर्ती प्रक्रिया की अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि इन मुद्दों पर सरकार ने अब तक कोई ठोस और जवाबदेह व्यवस्था नहीं बनाई है। इसी वजह से वह जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे हैं और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार बातचीत कर ठोस आश्वासन नहीं देती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
क्या हैं CJP की प्रमुख मांगें ?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से—

- पेपर लीक या परीक्षा रद्द होने पर अभ्यर्थियों को मुआवजा।
- बड़ी परीक्षाओं के लिए बैकअप परीक्षा तिथि तय करना।
- उत्तर पुस्तिकाओं की वैज्ञानिक और पारदर्शी जांच।
- देर से होने वाली परीक्षाओं में आयु सीमा में छूट।
- कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं का स्वतंत्र ऑडिट।
कैसे हुई CJP की शुरुआत ?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत मई 2026 में हुई। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके हैं। संगठन का दावा है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, युवाओं के अधिकार और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन चला रहा है।
दिल्ली, पुणे, लखनऊ, अमृतसर, जयपुर, नागपुर, हैदराबाद और बेंगलुरु समेत कई शहरों में CJP समर्थकों ने प्रदर्शन किए हैं।
पहले भी विवादों में रहे हैं वांगचुक

इससे पहले लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। वह करीब 170 दिन जोधपुर जेल में भी रह चुके हैं। उस दौरान लेह में हुई हिंसा के बाद उन पर कार्रवाई की गई थी।
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