Haryana Power Distribution : हरियाणा में पैरेलल बिजली डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसिंग को लेकर चल रहे विवाद के बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन (रजि.) की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) को निर्देश दिया है कि वह 28 सितंबर 2026 को एसोसिएशन की आपत्तियों और उसके पक्ष को सुने।

Written by Kajal Panchal • Published on : 22 September 2026
IBN24 NEWS NETWORK : न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की कोर्ट ने एसोसिएशन को 15 सितंबर 2026 को दाखिल की गई आपत्तियों के अलावा आवश्यक अतिरिक्त दस्तावेज और अन्य आपत्तियां पेश करने की भी अनुमति दी है। इससे एसोसिएशन को मामले में अपना पक्ष विस्तार से रखने का अवसर मिलेगा।
अतिरिक्त दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग
हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने HERC के समक्ष मांग रखी है कि मैसर्स इलेवन पावर लिमिटेड की ओर से आयोग के पास जमा कराए गए सभी अतिरिक्त दस्तावेजों की प्रतियां उसे तत्काल ईमेल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएं।

एसोसिएशन का कहना है कि इन दस्तावेजों को देखने के बाद ही वह 28 सितंबर को होने वाली सुनवाई में प्रभावी तरीके से अपना पक्ष रख सकेगी। इसी को लेकर एसोसिएशन ने दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की है।
पैरेलल लाइसेंसिंग पर एसोसिएशन के बड़े सवाल
एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर रविंद्र घणघस ने पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसिंग की नीति को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, बिजली वितरण व्यवस्था की तुलना टेलीकॉम सेक्टर से करना उचित नहीं है।
एक ही क्षेत्र में दो बिजली नेटवर्क बनाना कितना व्यावहारिक?
घणघस के मुताबिक, टेलीकॉम सेवाओं में वायरलेस तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है, जबकि बिजली वितरण के लिए खंभे, तार, लाइनें और ट्रांसफार्मर जैसे भौतिक बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है।

एसोसिएशन का तर्क है कि एक ही गली या क्षेत्र में दो अलग-अलग कंपनियों द्वारा समानांतर बिजली वितरण नेटवर्क तैयार करना आर्थिक और व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर के दोहराव और अतिरिक्त लागत का सवाल भी उठता है।
DHBVN के राजस्व पर असर का दावा
एसोसिएशन के अनुसार, मैसर्स इलेवन पावर लिमिटेड ने मुख्य रूप से गुरुग्राम और नूंह क्षेत्रों के लिए बिजली वितरण लाइसेंस की मांग की है।

रविंद्र घणघस का दावा है कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के कुल राजस्व में इन क्षेत्रों की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत से अधिक है। एसोसिएशन को आशंका है कि यदि अधिक राजस्व वाले क्षेत्र निजी कंपनी के पास चले जाते हैं तो DHBVN की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ सकता है।
एसोसिएशन का यह भी तर्क है कि इसका प्रभाव क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसके चलते किसानों, ग्रामीण उपभोक्ताओं और घरेलू बिजली उपभोक्ताओं पर भविष्य में दरों का दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।
बिजली निगमों के प्रदर्शन का भी दिया हवाला
एसोसिएशन ने हरियाणा के दोनों बिजली वितरण निगमों DHBVN और UHBVN के प्रदर्शन का भी हवाला दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि दोनों निगम राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन की रैंकिंग में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले निगमों में शामिल हैं।

एसोसिएशन का सवाल है कि जब मौजूदा वितरण निगम बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं तो समानांतर निजी वितरण व्यवस्था की आवश्यकता क्यों है।
किसान और औद्योगिक संगठनों से संपर्क करेगा संयुक्त मोर्चा
पैरेलल बिजली लाइसेंसिंग के मुद्दे को लेकर हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन और संयुक्त मोर्चा अब जनसंपर्क अभियान भी चला रहा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष इंजीनियर पुनीत कुंडू के अनुसार, आम जनता, किसानों, उद्योगों और बिजली उपभोक्ताओं को इस नीति के संभावित प्रभावों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
इसके अलावा किसान संगठनों से भी समर्थन मांगा जा रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि बिजली व्यवस्था का प्रभाव केवल बिजली निगमों या कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों पर भी पड़ता है।
पुनीत कुंडू ने कहा कि बिजली एक आवश्यक सार्वजनिक सेवा है और इसे केवल व्यावसायिक मुनाफे के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, HERC को लाइसेंसिंग पर कोई अंतिम फैसला लेने से पहले इसके दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का अध्ययन करना चाहिए।
अब 28 सितंबर की सुनवाई पर नजर
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब 28 सितंबर 2026 को HERC के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण हो गई है। इस दौरान हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन अपनी पहले से दाखिल आपत्तियों के साथ अतिरिक्त दस्तावेज और आपत्तियां भी रख सकेगी।
साथ ही, एसोसिएशन की ओर से इलेवन पावर लिमिटेड द्वारा जमा कराए गए अतिरिक्त दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। अब आगे की प्रक्रिया में HERC दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले में नियामकीय स्तर पर निर्णय की दिशा तय करेगा।
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