Haryana Milk Supply : हरियाणा में आने वाले दिनों में दूध की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। दूध के उचित दाम की मांग को लेकर किसानों और पशुपालकों ने 1 से 3 अक्टूबर तक दूध की सप्लाई बंद रखने का ऐलान किया है। सिरसा में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। पशुपालकों का कहना है कि बढ़ती लागत के मुकाबले दूध के मौजूदा दाम पर्याप्त नहीं हैं।

Written by Kajal Panchal • Published on : 29 September 2026
IBN24 NEWS NETWORK : बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि इस अवधि में हरियाणा के साथ-साथ पंजाब और राजस्थान की ओर जाने वाली दूध की सप्लाई भी बंद रखी जाएगी। दूध कारोबार से जुड़े कई लोगों ने भी इस फैसले का समर्थन किया है।
दूध बेचने पर 51 हजार रुपये जुर्माने का ऐलान
आंदोलन से जुड़े लोगों के मुताबिक 1 से 3 अक्टूबर के दौरान दूध बेचने वाले लोगों पर 51 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। दूध ढोने वाले वाहनों को जब्त करने की बात भी कही गई है। पकड़े गए दूध को गरीब बस्तियों में बांटने का निर्णय लिए जाने की जानकारी सामने आई है।

दूध की कंपनियों और डेयरी नेटवर्क से भी इन तीन दिनों के दौरान गांवों और शहरों में दूध की गाड़ियां नहीं भेजने की अपील की गई है।
पशुपालक क्यों कर रहे दूध के रेट बढ़ाने की मांग ?
पशुपालकों का कहना है कि पशुओं के चारे और दूसरे खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। उनके अनुसार इस समय सूखे चारे यानी तुड़ी का भाव करीब 1,000 से 1,100 रुपये प्रति क्विंटल तक है। खल का भाव 2,600 से 2,800 रुपये और बिनौले का भाव करीब 2,900 से 3,200 रुपये प्रति बैग बताया जा रहा है। एक बैग का वजन करीब 48 से 49 किलो होता है।
पशुपालकों के मुताबिक एक दुधारू पशु पर चारा और खल-बिनौला मिलाकर प्रतिदिन करीब 400 से 500 रुपये तक खर्च हो जाता है। वहीं, पशु की दूध उत्पादन क्षमता और घरेलू खपत को देखते हुए बिक्री के लिए बचने वाला दूध सीमित रह जाता है। ऐसे में उनका कहना है कि मौजूदा कीमतों पर पशु पालना आर्थिक रूप से मुश्किल हो रहा है।
सरकार की ओर से दूध के दाम में बढ़ोतरी, पशुपालक संतुष्ट नहीं
पशुपालकों के अनुसार दूध के दाम बढ़ाने की मांग पर सरकार की ओर से पांच रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई है। उनके मुताबिक नई दरें 20 सितंबर के बाद लागू हुई हैं।

पशुपालकों का दावा है कि भैंस के दूध का रेट बढ़ाकर 85 रुपये प्रति लीटर और गाय के दूध का रेट 68 से बढ़ाकर 72 रुपये प्रति लीटर किया गया है। हालांकि, पशुपालकों का कहना है कि लागत में हुई वृद्धि के मुकाबले यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। सिरसा में हुई बैठक के बाद इस मुद्दे को लेकर प्रदेशभर के पशुपालकों को जोड़ने की कवायद शुरू की गई है। इसके लिए राज्य स्तरीय बैठक भी बुलाई गई है।
हरियाणा में रोजाना कितना दूध होता है ?
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में प्रतिदिन करीब 3.4 से 3.5 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसमें से लगभग 50 से 60 लाख लीटर दूध संगठित डेयरी नेटवर्क और ब्रांडेड प्लांट्स के जरिए प्रोसेस होकर बाजार तक पहुंचता है।

राज्य में दूध की सप्लाई में सहकारी और निजी डेयरी कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वीटा के रोहतक स्थित मिल्क प्लांट की क्षमता करीब 4.5 लाख लीटर प्रतिदिन बताई जाती है। इसके अलावा जींद, अंबाला, सिरसा और बल्लभगढ़ स्थित वीटा प्लांट्स से भी दूध की सप्लाई होती है। अमूल का धारूहेड़ा स्थित प्लांट भी हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के लिए दूध प्रोसेसिंग और सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा है। इसके अलावा मदर डेयरी और अन्य निजी डेयरी कंपनियां भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में दूध पहुंचाती हैं।
सिरसा वीटा प्लांट से हजारों लीटर दूध की सप्लाई
सिरसा वीटा प्लांट में रोजाना औसतन करीब 70 से 75 हजार लीटर दूध आने की जानकारी दी गई है। इसमें गाय और भैंस दोनों का दूध शामिल है। बताया गया है कि यहां से करीब 30 से 35 हजार लीटर दूध डबवाली, फतेहाबाद, रतिया और आसपास के क्षेत्रों के अलावा पंजाब के मलौट तथा राजस्थान के गंगानगर और राजगढ़ क्षेत्र में भेजा जाता है।
आंदोलन को पूरे हरियाणा में फैलाने की तैयारी
सिरसा में आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए जिला स्तर पर कमेटी बनाई गई है। इसमें पशुपालकों और किसानों के कई प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। कमेटी की ओर से प्रदेशभर के पशुपालकों को अभियान से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
आंदोलन से जुड़े पशुपालकों का कहना है कि दूध का उचित मूल्य मिलने के साथ-साथ नकली दूध, घी, खोया और पनीर जैसी मिलावट पर भी रोक लगनी चाहिए। उनका कहना है कि इससे पशुपालकों को बेहतर कीमत मिलने के साथ उपभोक्ताओं को शुद्ध दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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