China Becomes World’s 5th Largest Gold Reserve Holder : दुनिया में सोने का भंडार बढ़ाने की होड़ के बीच चीन ने रूस को पीछे छोड़ते हुए सबसे ज्यादा गोल्ड रिजर्व रखने वाले देशों की सूची में पांचवां स्थान हासिल कर लिया है। चीन के पास अब 2,410 टन सोना है। वहीं, अमेरिका इस सूची में पहले नंबर पर बना हुआ है। भारत 881 टन सोने के भंडार के साथ आठवें स्थान पर है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 13 October 2026
IBN24 NEWS NETWORK : फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म ‘द कोबेसी लेटर’ के मुताबिक, चीन लगातार अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा कर रहा है। चीन अब इटली और फ्रांस से भी ज्यादा दूर नहीं है। अगर वहां का केंद्रीय बैंक इसी रफ्तार से सोना खरीदता रहा, तो चीन आने वाले समय में दुनिया के तीसरे सबसे बड़े गोल्ड रिजर्व वाले देशों में शामिल हो सकता है।
दुनिया में सबसे ज्यादा सोना किस देश के पास ?
गोल्ड रिजर्व के मामले में अमेरिका पहले स्थान पर है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देशों के पास सोने के भंडार की स्थिति इस प्रकार है:

इन आंकड़ों के अनुसार, चीन के पास भारत की तुलना में लगभग 2.7 गुना सोना है। हालांकि, यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये आंकड़े देशों के आधिकारिक गोल्ड रिजर्व को दर्शाते हैं, न कि उनके पास मौजूद कुल निजी या खनन से निकाले गए सोने को।
फ्रांस और इटली से कितना पीछे है चीन ?
चीन अब गोल्ड रिजर्व के मामले में फ्रांस और इटली के काफी करीब पहुंच गया है। इटली के पास 2,452 टन सोना है, जबकि फ्रांस के पास 2,437 टन गोल्ड रिजर्व है। दूसरी ओर, चीन के पास 2,410 टन सोना है। यानी चीन को फ्रांस से आगे निकलने के लिए करीब 27 टन और इटली से आगे निकलने के लिए करीब 42 टन सोना जोड़ना होगा।

चीन का केंद्रीय बैंक, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना, पिछले कई महीनों से लगातार सोने की खरीदारी कर रहा है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाना और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना माना जाता है। सोना दुनिया के केंद्रीय बैंकों के लिए सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सितंबर में चीन ने खरीदा 23 टन से ज्यादा सोना
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने सितंबर में 23 टन से ज्यादा सोना खरीदा। यह पिछले एक साल में किसी एक महीने के दौरान उसकी सबसे बड़ी खरीदारी बताई गई है। इससे पहले जुलाई और अगस्त में भी चीन ने हर महीने 20 टन से अधिक सोना खरीदा था। रिपोर्ट में सितंबर तक इस साल की कुल खरीदारी 103 टन से ज्यादा बताई गई है।

लगातार खरीदारी से चीन के गोल्ड रिजर्व को मजबूती मिली है। वहीं, वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों की सोने में बढ़ती दिलचस्पी के कारण भी गोल्ड मार्केट पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,200 डॉलर के पार
सोने की कीमतों में तेजी का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी देखने को मिला है। दी गई रिपोर्ट के अनुसार, सोना लगभग 4,207 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच गया, जबकि चांदी करीब 61.12 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें अमेरिकी डॉलर की चाल, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, महंगाई के आंकड़े और वैश्विक तनाव प्रमुख हैं।

जब निवेशकों को आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने का अंदेशा होता है, तो वे अक्सर सोने को सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में देखते हैं। हालांकि, ब्याज दरों और डॉलर में बदलाव से सोने की मांग तथा कीमतों पर विपरीत असर भी पड़ सकता है।
आगे सोने की कीमतों पर रहेगी नजर

ओवरसीज-चाइनीज बैंकिंग कॉरपोरेशन (OCBC) के स्ट्रैटेजिस्ट क्रिस्टोफर वोंग के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी डॉलर में कमजोरी से सोने की कीमतों को सहारा मिल सकता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बाद महंगाई बढ़ने की आशंकाओं के कारण सोने की कीमतों में गिरावट आई थी। अब बाजार में सुधार के संकेतों के बीच निवेशक आगे के आर्थिक आंकड़ों पर नजर रख रहे हैं।
भारत के लिए क्या मायने रखता है गोल्ड रिजर्व ?
भारत के पास 881 टन का आधिकारिक गोल्ड रिजर्व है और वह दुनिया में आठवें स्थान पर है। सोने का भंडार किसी देश की वित्तीय सुरक्षा और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने में मदद कर सकता है। हालांकि, किसी देश की आर्थिक ताकत केवल उसके गोल्ड रिजर्व से तय नहीं होती। विदेशी मुद्रा भंडार, अर्थव्यवस्था का आकार, व्यापार, उत्पादन और वित्तीय स्थिरता जैसे कई अन्य कारक भी महत्वपूर्ण हैं।
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