Robotic Sewer Cleaning : राजस्थान में सीवरेज चैंबर की सफाई का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब कई शहरों में कर्मचारियों की जगह ‘बैंडीकूट’ (Bandicoot) रोबोट सीवरेज की सफाई करेगा। यह रोबोट 30 फीट तक गहरे सीवरेज चैंबर में उतरकर गंदगी और भारी कचरा निकाल सकता है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 11 July 2026
IBN24 News Network : सबसे बड़ी बात यह है कि सफाई के दौरान किसी कर्मचारी को जहरीली गैस या गंदगी के बीच उतरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह तकनीक न केवल सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, बल्कि सफाईकर्मियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी।
35 से ज्यादा शहरों में होगा इस्तेमाल

जेन रोबोटिक इनोवेशन कंपनी द्वारा विकसित ‘बैंडीकूट’ रोबोट का इस्तेमाल राजस्थान के 35 से अधिक शहरों में किया जाएगा। फिलहाल जोधपुर और भीलवाड़ा में इसका ट्रायल चल रहा है, जबकि जयपुर में तीन रोबोट नियमित रूप से काम शुरू कर चुके हैं। कंपनी के अनुसार यह प्रोजेक्ट देश के 21 राज्यों में भी संचालित किया जा रहा है।
30 फीट नीचे जाकर करेगा सफाई
यह रोबोट करीब 30 फीट गहरे सीवरेज चैंबर में उतर सकता है। इसमें एआई (AI) आधारित मैकेनिकल हाथ और पैर लगाए गए हैं, जिनकी मदद से यह चैंबर के चारों ओर जमा कचरा साफ करता है। रोबोट एक बार में लगभग 25 किलो तक कचरा और भारी पत्थर बाहर निकाल सकता है। पूरी सफाई प्रक्रिया में लगभग 20 से 30 मिनट का समय लगता है, जबकि सामान्य तौर पर यही काम कई कर्मचारियों को मिलकर करना पड़ता है।

चार कैमरों से लाइव मॉनिटरिंग
बैंडीकूट रोबोट में कुल चार कैमरे लगाए गए हैं। इनमें एक एचडी कैमरा ऊपर की ओर लगा है, जबकि तीन कैमरे नीचे की तरफ लगे हैं। जैसे ही रोबोट सीवरेज में उतरता है, सभी कैमरे लाइव वीडियो ऑपरेटर के मॉनिटर पर दिखाते हैं। इससे ऑपरेटर बिना किसी जोखिम के बाहर बैठकर पूरी सफाई प्रक्रिया को नियंत्रित कर सकता है।
जहरीली गैस का तुरंत अलर्ट
सीवरेज की सफाई के दौरान सबसे बड़ा खतरा जहरीली गैसों का होता है। इस रोबोट में लगे विशेष सेंसर मिथेन (Methane), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), हाइड्रोजन सल्फाइड (H₂S) और धुएं (Smoke) जैसी जहरीली गैसों का स्तर तुरंत पता लगा लेते हैं। यदि गैस की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंचती है तो सिस्टम तुरंत अलर्ट देता है, जिससे कर्मचारियों की जान जोखिम में नहीं पड़ती।
ऑटोमैटिक तरीके से निकलेगा कचरा

रोबोट के साथ कम्प्रेसर, जनरेटर और प्रेशर जेटिंग सिस्टम भी लगाया गया है, जो सीवरेज लाइन की सफाई को और प्रभावी बनाता है। सफाई के बाद रोबोट द्वारा निकाला गया कचरा सीधे एक ऑटोमैटिक डस्टबिन में डाल दिया जाता है। इसके लिए किसी कर्मचारी को कचरे को हाथ लगाने की जरूरत नहीं होती। एक बटन दबाते ही डस्टबिन रोबोट के नीचे आ जाता है और पूरा कचरा उसमें गिर जाता है।
5-6 कर्मचारियों का काम अकेला करेगा रोबोट


नगर निकाय अधिकारियों के अनुसार यह एक रोबोट अकेले 5 से 6 कर्मचारियों के बराबर काम कर सकता है। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि सीवरेज में उतरकर सफाई करने वाले कर्मचारियों की जान पर मंडराने वाला खतरा भी काफी हद तक खत्म हो जाएगा। सरकार का उद्देश्य मैनुअल सीवर सफाई को पूरी तरह समाप्त कर तकनीक आधारित सुरक्षित व्यवस्था लागू करना है।
इन शहरों में पहुंचेगा बैंडीकूट रोबोट
राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, भीलवाड़ा, पाली, अजमेर, पुष्कर, जैसलमेर, बड़ी सादड़ी, सूरतगढ़, करौली, सुमेरपुर, राजसमंद, फतेहनगर, चिड़ावा, नवलगढ़, कुशलगढ़ और नाथद्वारा सहित 35 से अधिक शहरों में इस रोबोट का इस्तेमाल किया जाएगा। आने वाले समय में अन्य नगर निकायों में भी इस तकनीक को लागू करने की तैयारी है।
जोधपुर में सफल रहा ट्रायल
जोधपुर नगर निगम ने हाल ही में बैंडीकूट रोबोट खरीदा है और फिलहाल इसका पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। ट्रायल के दौरान रोबोट ने पहले सीवर में फंसे बड़े पत्थर निकाले और फिर एक बार में करीब 25 किलो कचरा बाहर निकाला। पूरी प्रक्रिया के दौरान ऑपरेटर को मॉनिटर पर सीवरेज की लाइव तस्वीरें और जहरीली गैसों की रियल-टाइम जानकारी मिलती रही, जिससे बिना किसी कर्मचारी को अंदर उतारे सुरक्षित तरीके से सफाई पूरी की गई।





















