Asian Games : हरियाणा के जींद जिले के गांव डाहौला के रहने वाले हिमांशु ढिल्लों ने जापान में चल रहे एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग में दो रजत पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। हिमांशु की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने अपने खेल करियर की शुरुआत कुश्ती से की थी। हालांकि बाद में कोच की सलाह पर उन्होंने कुश्ती छोड़कर शूटिंग को अपना करियर बनाया।

Written by Kajal Panchal • Published on : 23 September 2026
IBN24 NEWS NETWORK : हिमांशु के खेल सफर में कई उतार-चढ़ाव आए। कोविड के दौरान करीब छह महीने तक उन्होंने अपने पिता के साथ खेत में काम किया और पसीना बहाया। इसके बाद दोबारा खेलों में लौटने की इच्छा जताई। कोच ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें कुश्ती की जगह एयर राइफल शूटिंग में आगे बढ़ने की सलाह दी। इसके बाद हिमांशु ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
2018 में कुश्ती से शुरू किया था खेल सफर
गांव डाहौला निवासी हिमांशु ने वर्ष 2018 में खेलों की शुरुआत कुश्ती से की थी। उनके चाचा और कॉमनवेल्थ कुश्ती खिलाड़ी हरजीत ढिल्लो ने उन्हें खेलों से जोड़ा था। शुरुआत में हिमांशु की खेलों में ज्यादा रुचि नहीं थी, लेकिन परिवार और कोच के प्रयासों से उन्होंने खेल को गंभीरता से लेना शुरू किया।
कोविड के दौरान जब खेल गतिविधियां बंद हुईं तो उनके पिता शमशेर सिंह ढिल्लों ने उन्हें खेती के काम में लगा दिया। हिमांशु ने करीब छह महीने तक खेत में काम किया। इस दौरान उन्होंने मेहनत और शारीरिक श्रम किया। इसके बाद उन्होंने दोबारा खेलों में लौटने की इच्छा जताई।
कोच ने कुश्ती छोड़ शूटिंग में आने की दी सलाह
हिमांशु के पिता शमशेर सिंह ढिल्लों के अनुसार, कोच कुलदीप नेहरा ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें कुश्ती के बजाय शूटिंग में आने की सलाह दी। हिमांशु ने कोच की सलाह मानी और एयर राइफल शूटिंग में अभ्यास शुरू किया।

शूटिंग में आने के बाद हिमांशु ने लगातार मेहनत की और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई। इसी मेहनत का परिणाम अब एशियन गेम्स में दो रजत पदक के रूप में सामने आया है।
इसी साल दिल्ली शिफ्ट हुए हिमांशु
हिमांशु के पिता ने बताया कि बेहतर तैयारी और अभ्यास के लिए हिमांशु इसी साल दिल्ली शिफ्ट हुए थे। दिल्ली में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारी जारी रखी।
एशियन गेम्स में दो पदक जीतने के साथ ही हिमांशु ने दोहा में होने वाले आगामी अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए भी अपना टिकट पक्का कर लिया है। इससे उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को एक नई दिशा मिली है।
पिता ने कोच और सहयोगियों को दिया श्रेय
हिमांशु के पिता शमशेर सिंह ढिल्लों एक एग्रीकल्चर कंपनी में मैनेजर हैं। उन्होंने बेटे की उपलब्धि का श्रेय कोच के साथ सांसद नवीन जिंदल और ओलिंपिक गोल्ड पोस्ट के सहयोग को भी दिया।

उन्होंने बताया कि हिमांशु का चयन आगामी अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए हो चुका है। परिवार को उम्मीद है कि वह आने वाली प्रतियोगिताओं में भी देश के लिए पदक जीतेंगे।
2025 से लगातार शानदार प्रदर्शन
हिमांशु ने पिछले कुछ वर्षों में शूटिंग में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है।
- वर्ष 2025 में दिल्ली में आयोजित 10 मीटर एयर आईएसएसएफ जूनियर प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता।
- वर्ष 2025 में आईएसएसएफ जूनियर वर्ल्ड कप में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
- वर्ष 2026 में एशियन चैंपियनशिप में जूनियर वर्ग में गोल्ड मेडल जीता।
- इसी प्रतियोगिता में मिक्स्ड इवेंट में भी गोल्ड मेडल हासिल किया।
- इससे पहले राज्य और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में भी हिमांशु कई पदक जीत चुके हैं।
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