India Launches AI Satellite : भारत ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हैदराबाद की कंपनी टेकमीटूस्पेस (TakeMe2Space) का MOI-1A सैटेलाइट लॉन्च किया गया है। कंपनी के मुताबिक यह भारत का पहला ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट है, जो अंतरिक्ष में ही सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरों और डेटा का AI की मदद से विश्लेषण कर सकेगा।

Written by Kajal Panchal • Published on : 2 October 2026
IBN24 NEWS NETWORK : MOI-1A को स्पेसएक्स के Transporter-18 मिशन के जरिए रात 11:48 बजे अंतरिक्ष में भेजा गया। इस तकनीक के साथ भारत ऐसी क्षमता विकसित करने वाला अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और चीन के बाद दुनिया का चौथा देश बन गया है।
अंतरिक्ष में ही डेटा का विश्लेषण करेगा AI सैटेलाइट
आमतौर पर सैटेलाइट धरती की तस्वीरें और दूसरे तरह का डेटा इकट्ठा करके उसे पृथ्वी पर स्थित ग्राउंड स्टेशन तक भेजते हैं। इसके बाद इस डेटा का विश्लेषण किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में समय और डेटा ट्रांसफर की लागत लगती है।

MOI-1A में यह प्रक्रिया काफी हद तक अंतरिक्ष में ही की जा सकेगी। सैटेलाइट में मौजूद AI और कंप्यूटिंग सिस्टम तस्वीरों और डेटा का शुरुआती विश्लेषण करेगा और उपयोगी जानकारी को पहचानकर उसे धरती पर भेज सकेगा। कंपनी के CEO रौनक कुमार सामंत राय के मुताबिक, अगर किसी सैटेलाइट ने 300 GB डेटा इकट्ठा किया और उसमें से केवल 5 GB डेटा उपयोगी है, तो AI सिस्टम जरूरी जानकारी की पहचान कर सकता है। इसके बाद केवल जरूरी डेटा को धरती पर भेजने से ट्रांसफर का समय और खर्च कम किया जा सकता है।
बॉर्डर निगरानी से बाढ़ और खेती तक में इस्तेमाल
MOI-1A जैसी ऑर्बिटल कंप्यूटिंग तकनीक का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। इनमें सीमा निगरानी, बाढ़ की स्थिति का आकलन, जंगलों की निगरानी, फसल और कृषि क्षेत्र की निगरानी, खनन क्षेत्रों की निगरानी और जमीन से जुड़े विश्लेषण शामिल हैं।

उदाहरण के तौर पर बाढ़ के दौरान सैटेलाइट बड़ी संख्या में तस्वीरें ले सकता है। AI सिस्टम इन तस्वीरों का अंतरिक्ष में ही विश्लेषण करके यह पता लगाने में मदद कर सकता है कि पानी कितने क्षेत्र में फैला है। इसके बाद जरूरी जानकारी को प्राथमिकता के आधार पर धरती तक भेजा जा सकता है।
इसी तरह कृषि क्षेत्र में फसलों की स्थिति, जंगलों में बदलाव और सीमा क्षेत्रों में होने वाले बदलावों की पहचान के लिए भी ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
117 TOPS की कंप्यूटिंग क्षमता
कंपनी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, MOI-1A में 117 TOPS की कंप्यूटिंग क्षमता है। TOPS का मतलब Trillion Operations Per Second यानी एक सेकंड में खरबों ऑपरेशन करने की क्षमता से है।

सैटेलाइट में AI मॉडल चलाने के लिए कंप्यूटिंग सिस्टम के साथ स्टोरेज की सुविधा भी दी गई है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष में ही डेटा को प्रोसेस करना और केवल जरूरी जानकारी को धरती तक पहुंचाना है।
2028 तक अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने की योजना
टेकमीटूस्पेस ने भविष्य में अंतरिक्ष में बड़ा डेटा सेंटर विकसित करने की योजना भी बताई है। कंपनी के अनुसार 2028 तक इस दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य है।

इसके लिए ज्यादा क्षमता वाले सैटेलाइट भेजने की योजना है। इन सैटेलाइट का वजन करीब 100-100 किलो रखा जा सकता है। इनमें बड़ी संख्या में ग्राफिक्स प्रोसेसर और करीब 100 टेराबाइट तक स्टोरेज उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है। कई सैटेलाइट को आपस में जोड़कर अंतरिक्ष में ही बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग और विश्लेषण करने की सुविधा विकसित करने का लक्ष्य है।
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