Haryana Electricity Unions Action : हरियाणा में बिजली विभाग की हड़ताल के बाद कर्मचारी यूनियनों ने संगठन के निर्देशों का पालन नहीं करने वाले सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। पैरेलल लाइसेंस व्यवस्था के विरोध में 22 से 24 अक्टूबर तक चली हड़ताल के दौरान ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों पर अब यूनियन की अनुशासनात्मक कार्रवाई का असर दिखाई देने लगा है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 26 October 2026
IBN24 NEWS NETWORK : पंचकूला में एक जूनियर इंजीनियर (JE) और जींद में एक लोअर डिविजन क्लर्क (LDC) की सदस्यता समाप्त कर दी गई है। वहीं, बिजली इंजीनियर एसोसिएशन भी उन अधिकारियों की पहचान कर रही है, जिन्होंने हड़ताल के दौरान काम जारी रखा था।
पंचकूला के JE पर गिरी गाज
ऑल हरियाणा पावर कॉर्पोरेशन वर्कर यूनियन (AHPCWU) ने माता मनसा देवी सब-डिवीजन, पंचकूला में तैनात जूनियर इंजीनियर मुरलीधर की यूनियन सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है। यूनियन के अनुसार, हड़ताल के दौरान संगठन के आह्वान के बावजूद ड्यूटी जारी रखना कार्रवाई की वजह बना।

सदस्यता रद्द होने के बाद मुरलीधर को यूनियन के संविधान के तहत मिलने वाले अधिकारों और सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा। इस फैसले को यूनियन ने संगठनात्मक अनुशासन से जोड़कर देखा है।
जींद की LDC अंजू पर पांच साल का प्रतिबंध
इसी तरह, जींद के सब-डिवीजन नंबर-2 में कार्यरत लोअर डिविजन क्लर्क (LDC) अंजू के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। HSEB वर्कर यूनियन, भिवानी मुख्यालय ने उनकी सदस्यता समाप्त करने का फैसला लिया है।
यूनियन के निर्णय के अनुसार, अंजू को अगले पांच वर्षों तक दोबारा संगठन में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, भविष्य में उन्हें यूनियन की ओर से किसी प्रकार का सहयोग नहीं देने का भी फैसला किया गया है। यह कार्रवाई 22, 23 और 24 अक्टूबर को हुई साझा संघर्ष हड़ताल के निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप में की गई है।
अब बिजली अधिकारियों की भी होगी जांच
कर्मचारी यूनियनों की कार्रवाई के बीच हरियाणा पॉवर इंजीनियर एसोसिएशन ने भी हड़ताल के दौरान ड्यूटी करने वाले अधिकारियों का रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। एसोसिएशन ऐसे अधिकारियों की सूची तैयार कर रही है, जिन्होंने हड़ताल में शामिल होने के बजाय अपना काम जारी रखा था।
सूची तैयार होने के बाद संबंधित अधिकारियों की सदस्यता को लेकर कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, अधिकारियों के खिलाफ अंतिम निर्णय और कार्रवाई की विस्तृत जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।
निजीकरण के विरोध में थी हड़ताल
बिजली कर्मचारी और इंजीनियर पैरेलल लाइसेंस व्यवस्था के विरोध में हड़ताल पर गए थे। यूनियनों का कहना था कि उनकी मांगें बिजली व्यवस्था को निजीकरण से बचाने और कर्मचारियों के हितों से जुड़ी हैं। हड़ताल के बाद मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता में यूनियनों ने अपनी मांगों पर सहमति बनने का दावा किया था।
अब हड़ताल के दौरान काम करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू होने से बिजली विभाग में संगठनात्मक अनुशासन और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।
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