UPI Charge : UPI पेमेंट को लेकर एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% चार्ज लगाने के फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस व्यवस्था का आधार और नियमों से जुड़ी जानकारी मांगी है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 28 September 2026
IBN24 NEWS NETWORK : यह मामला एडवोकेट अंजन दत्ता की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय बेंच ने मामले की सुनवाई की। याचिका में ₹2,000 की सीमा तय करने और UPI तथा RuPay कार्ड के लिए अलग-अलग नियम होने पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने इस तरह की फीस व्यवस्था को रद्द करने की मांग की है।
₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर क्या है नया नियम ?

प्रस्तुत जानकारी के मुताबिक, जिन कारोबारियों का मासिक UPI कलेक्शन ₹1 लाख से ज्यादा है, उनके लिए ₹2,000 से अधिक के प्रत्येक मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR और उस पर लागू GST का प्रावधान बताया गया है।
हालांकि, छोटे व्यापारियों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। जिन दुकानदारों का मासिक UPI कलेक्शन ₹1 लाख तक है, उनके लिए ट्रांजैक्शन मुफ्त रहने की बात कही गई है। वहीं, ₹2,000 तक के पेमेंट पर भी बड़े कारोबारियों से MDR नहीं लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ ?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से ₹2,000 की सीमा को लेकर सवाल उठाया गया। याचिका में यह भी पूछा गया कि UPI और RuPay कार्ड के लिए अलग-अलग शुल्क व्यवस्था क्यों है।

याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि इस तरह की फीस तय करने से पहले पर्याप्त सार्वजनिक चर्चा नहीं की गई। इसके अलावा, Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A से संबंधित प्रावधान को भी चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल चार्ज लगाने की व्यवस्था पर रोक नहीं लगाई है। साथ ही केंद्र सरकार से इस व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा है।
सरकार ने कोर्ट में क्या कहा ?
केंद्र सरकार की ओर से ASG एन. वेंकटरमण ने अदालत में कहा कि आम लोगों के बीच होने वाले व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर पर यह चार्ज लागू नहीं होगा।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि देश में लगभग 96% छोटे दुकानदारों से जुड़े भुगतानों पर इस व्यवस्था का असर नहीं पड़ेगा। इसका मतलब है कि प्रस्तावित शुल्क का मुख्य असर उन मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर होगा जो निर्धारित सीमा और कारोबारी श्रेणी में आते हैं।
कारोबारियों पर कितना चार्ज लगेगा ?
प्रस्तुत नियमों के अनुसार इसे इस तरह समझा जा सकता है:
1. ₹2,000 तक का पेमेंट
बड़े व्यापारियों को भी ₹2,000 तक के प्रत्येक UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR नहीं देना होगा।
2. ₹2,000 से ज्यादा का पेमेंट
जिन कारोबारियों का मासिक UPI कलेक्शन ₹1 लाख से अधिक है, उनके ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर 0.4% MDR और लागू GST लग सकता है।
3. छोटे व्यापारियों को राहत
जिन कारोबारियों का मासिक UPI कलेक्शन ₹1 लाख तक है, उनके लिए सभी UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहने की बात कही गई है।
4. लगातार ज्यादा कलेक्शन पर कैटेगरी बदल सकती है
अगर कोई व्यापारी लगातार तीन महीने तक ₹1 लाख से अधिक का UPI कलेक्शन करता है, तो उसे बड़े व्यापारियों की श्रेणी में शामिल किए जाने का प्रावधान बताया गया है। इसके बाद निर्धारित नियमों के अनुसार MDR लागू हो सकता है।
5. ₹75,000 या उससे ज्यादा के पेमेंट पर कैप
प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, ₹75,000 या उससे अधिक के पेमेंट पर MDR की अधिकतम राशि ₹300 तय की गई है। इसके ऊपर लागू GST अलग से होगा।
क्या ग्राहक से भी चार्ज लिया जाएगा ?
यह शुल्क मर्चेंट से संबंधित है। यानी सामान्य स्थिति में ग्राहक द्वारा UPI से भुगतान करने पर ग्राहक से सीधे 0.4% शुल्क लेने की बात नहीं है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई ग्राहक किसी दुकान पर ₹5,000 का UPI पेमेंट करता है, तो निर्धारित पात्रता के तहत शुल्क व्यापारी की ओर से देय होगा, ग्राहक की ओर से नहीं। हालांकि, किसी विशेष बैंक, पेमेंट ऐप या सेवा की अलग शर्तें हों तो ग्राहकों को संबंधित सेवा की जानकारी भी देखनी चाहिए।
₹2,000 की सीमा कैसे लागू होगी ?
₹2,000 की सीमा पूरे दिन की बिक्री पर नहीं बल्कि प्रत्येक अलग-अलग पेमेंट पर लागू होगी।
उदाहरण के लिए, किसी व्यापारी को एक दिन में ₹10,000 के पांच अलग-अलग पेमेंट मिलते हैं और प्रत्येक पेमेंट ₹2,000 से ज्यादा है, तो निर्धारित नियमों के तहत हर पात्र ट्रांजैक्शन को अलग-अलग देखा जाएगा।
MDR क्या होता है ?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो व्यापारी को डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा के लिए पेमेंट सिस्टम से जुड़ी संस्थाओं को देना पड़ सकता है।
यह शुल्क पेमेंट प्रोसेसिंग, सिस्टम और संबंधित सेवाओं की लागत से जुड़ा होता है। UPI में लंबे समय से जीरो-MDR व्यवस्था के कारण छोटे और बड़े कारोबारियों के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण रहा है।
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