Wholesale Inflation Rises in June : देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। जून 2026 में थोक महंगाई (Wholesale Price Index-WPI) बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई, जो मई में 9.68% थी। यह पिछले 44 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले सितंबर 2022 में थोक महंगाई 10.70% दर्ज की गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने सोमवार (14 जुलाई) को जून महीने के थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए।

Written by Kajal Panchal • Published on : 14 July 2026
IBN24 News Network : महंगाई में इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह रोजमर्रा की जरूरत के सामान और खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में आई तेजी रही। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण आने वाले महीनों में महंगाई पर और दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
लगातार बढ़ रही है खुदरा महंगाई
थोक महंगाई के साथ-साथ रिटेल महंगाई (CPI) भी लगातार बढ़ रही है। जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38% हो गई, जबकि मई में यह 3.93% थी। जनवरी में यह 2.74% थी। यानी लगातार छह महीने से महंगाई में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। खाद्य वस्तुओं, खासकर आलू, अदरक और अन्य सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण मानी जा रही है।
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बढ़ी महंगाई ?

कॉमर्स मिनिस्ट्री के अनुसार, जून में विभिन्न श्रेणियों में महंगाई की स्थिति इस प्रकार रही—
- रोजमर्रा की जरूरत के सामान (Primary Articles) की महंगाई 4.99% से बढ़कर 7.00% हो गई।
- खाद्य वस्तुओं (Food Index) की महंगाई 4.49% से बढ़कर 6.14% पहुंच गई।
- फ्यूल और पावर की महंगाई 30.33% से घटकर 27.41% रही।
- मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की महंगाई 7.48% पर स्थिर रही।
अमेरिका-ईरान तनाव का भी पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर भारत में परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
WPI किन हिस्सों से मिलकर बनता है ?
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) तीन प्रमुख हिस्सों पर आधारित होता है—

- मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स – 64.23%
- प्राइमरी आर्टिकल्स – 22.62%
- फ्यूल एंड पावर – 13.15%
प्राइमरी आर्टिकल्स के अंतर्गत खाद्यान्न, फल-सब्जियां, ऑयल सीड, खनिज और कच्चा पेट्रोलियम जैसी वस्तुएं शामिल होती हैं।
आम लोगों पर क्या होगा असर ?
जब थोक महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहती है तो कंपनियां उत्पादन लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल देती हैं। इसका असर बाजार में रोजमर्रा के सामान, खाद्य पदार्थ, घरेलू उपयोग की वस्तुओं और अन्य उत्पादों की कीमतों पर पड़ता है।
सरकार टैक्स और एक्साइज ड्यूटी में कटौती जैसे कदम उठाकर कुछ हद तक राहत दे सकती है, लेकिन इसकी भी सीमाएं होती हैं।
थोक और खुदरा महंगाई में क्या अंतर है ?

रिटेल महंगाई (CPI) उस कीमत को दर्शाती है, जिस पर आम उपभोक्ता बाजार से सामान खरीदते हैं।
वहीं थोक महंगाई (WPI) उन कीमतों पर आधारित होती है, जिन पर निर्माता या थोक कारोबारी एक-दूसरे को सामान बेचते हैं।
दोनों महंगाई दरें देश की आर्थिक स्थिति और बाजार में कीमतों के रुझान को समझने के लिए महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती हैं.
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