Delhi Ambala Railway Expansion : दिल्ली से अंबाला के बीच रेल यातायात की क्षमता बढ़ाने के लिए रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली-पानीपत-अंबाला तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना के तहत अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। करीब ₹5,983 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना से इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 3 October 2026
IBN24 NEWS NETWORK : उत्तर रेलवे के निर्माण संगठन की ओर से भारत के राजपत्र में जारी अधिसूचनाओं में हरियाणा के करनाल, पानीपत और अंबाला जिलों में परियोजना के लिए आवश्यक जमीन का विवरण जारी किया गया है। इसके साथ ही संबंधित भू-स्वामियों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर भी दिया गया है।
रेलवे अधिनियम के तहत शुरू हुआ जमीन अधिग्रहण
रेलवे ने रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 20ए (1) के तहत प्रस्तावित जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की है। अधिसूचना में शामिल जमीन के मालिक या उसमें किसी तरह का हित रखने वाले व्यक्ति निर्धारित समय के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से 30 दिन के अंदर लिखित आपत्ति संबंधित जिले के जिला राजस्व अधिकारी (DRO) के सामने जमा कराई जा सकती है। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी प्राप्त आपत्तियों पर सुनवाई करेंगे और नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
करनाल में 3.1066 हेक्टेयर जमीन चिह्नित
करनाल जिले में परियोजना के लिए 3.1066 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। यह जमीन करनाल तहसील के डिपो गांव में है।

अधिसूचना के अनुसार, प्रस्तावित अधिग्रहण को लेकर आपत्ति दर्ज कराने वाले भू-स्वामियों के लिए जिला राजस्व अधिकारी, करनाल को सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है। इसलिए संबंधित जमीन के मालिक निर्धारित समय सीमा में अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
पानीपत के 13 गांवों में भी जमीन अधिग्रहण
पानीपत जिले में भी तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है। यहां समालखा तहसील के सात और पानीपत तहसील के छह गांवों की जमीन परियोजना में शामिल है।

समालखा तहसील के भोड़वाल माजरी, चुलकाना, किवाना, मनाना, करहंस, मछरौली और झट्टीपुर गांव शामिल हैं।
वहीं पानीपत तहसील के दीवाना, सिवाह, काबड़ी, सराय बछड़ा, निजामपुर और इंसार गांवों की जमीन भी प्रस्तावित रेल परियोजना के दायरे में आ रही है।
30 दिन में दर्ज करानी होगी आपत्ति
अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रभावित भू-स्वामियों के लिए आपत्ति दर्ज कराने का चरण शुरू हो गया है। संबंधित लोगों को 30 दिन के भीतर लिखित आपत्ति सक्षम प्राधिकारी के समक्ष जमा करनी होगी।
इसके बाद प्राप्त आपत्तियों पर सुनवाई होगी। हालांकि, आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही रेलवे अधिनियम के तहत जमीन अधिग्रहण की अगली कार्रवाई आगे बढ़ेगी। ऐसे में अधिसूचना में दिए गए खसरा नंबरों से जुड़े भू-स्वामियों के लिए यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।
दिल्ली-अंबाला रेल रूट पर बढ़ेगी क्षमता
दिल्ली-पानीपत-अंबाला रेलखंड देश के व्यस्त रेल मार्गों में शामिल है। इस रूट पर तीसरी और चौथी लाइन बिछने से ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होंगे।

इसके परिणामस्वरूप ट्रेनों को एक-दूसरे के गुजरने के लिए लंबे समय तक इंतजार करने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही, भविष्य में इस रेलखंड पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और परिचालन को अधिक सुचारु बनाने में भी मदद मिल सकती है।
चंडीगढ़-मोरिंडा रेलखंड का भी होगा दोहरीकरण
इसके अलावा चंडीगढ़-मोरिंडा रेलखंड के दोहरीकरण की दिशा में भी रेलवे ने काम शुरू कर दिया है। इसके लिए फाइनल लोकेशन सर्वे के साथ जियोटेक्निकल जांच, मिट्टी की जांच और बोरिंग का काम किया जा रहा है।
फिलहाल इस रेलखंड पर सिंगल लाइन होने के कारण विपरीत दिशा से आने वाली ट्रेनों को कई बार क्रॉसिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है। दूसरी लाइन बनने के बाद रेल यातायात की क्षमता बढ़ने और ट्रेनों के संचालन में सुधार की उम्मीद है। इसका लाभ खास तौर पर दिल्ली से पंजाब और जम्मू-कटरा की ओर चंडीगढ़ के रास्ते जाने वाली ट्रेनों को मिल सकता है।
यात्रियों के साथ मालगाड़ियों को भी मिलेगा फायदा
दिल्ली-पानीपत-अंबाला रेल मार्ग पर अतिरिक्त दो लाइनें बनने से यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों के संचालन के लिए भी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। वहीं, चंडीगढ़-मोरिंडा रेलखंड के दोहरीकरण से इस रूट पर ट्रेनों के क्रॉसिंग की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
इस तरह दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य उत्तर भारत के महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क पर क्षमता बढ़ाना और रेल परिचालन को अधिक सुचारु बनाना है।
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