Haryana Sugarcane Price Protest : हरियाणा में गन्ने के नए रेट को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। राज्य सरकार की ओर से अगले दो वर्षों के लिए गन्ने का भाव बढ़ाने के फैसले के बावजूद किसान संगठन संतुष्ट नहीं हैं। किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन गन्ने के दाम में की गई बढ़ोतरी बेहद कम है। ऐसे में किसान अब सरकार के खिलाफ विरोध की तैयारी कर रहे हैं।

Written by Kajal Panchal • Published on : 31 October 2026
IBN24 NEWS NETWORK : भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने इस मुद्दे पर चर्चा करने और आगे की रणनीति बनाने के लिए 5 नवंबर को कुरुक्षेत्र में बैठक बुलाई है। यह बैठक सुबह 11 बजे होगी। इसमें गन्ने के उचित भाव और किसानों के आंदोलन को लेकर अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
सरकार ने दो साल के लिए तय किए गन्ने के नए रेट
हरियाणा सरकार ने गन्ने के भाव में बढ़ोतरी करते हुए आगामी दो वर्षों के लिए नए रेट निर्धारित किए हैं। इसके तहत वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने का भाव 430 रुपये प्रति क्विंटल और वर्ष 2027-28 के लिए 450 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।

सरकार के इस फैसले से दो वर्षों में गन्ने के भाव में कुल 35 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, किसान संगठनों का मानना है कि मौजूदा महंगाई और खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है।
किसान यूनियन की दो टूक, ₹600 से कम भाव मंजूर नहीं
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रवक्ता राकेश बैंस ने सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि गन्ने के भाव में केवल 15 रुपये की बढ़ोतरी किसानों के साथ अन्याय है। किसान अब इस तरह की मामूली बढ़ोतरी स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने साफ कहा कि किसानों को गन्ने का भाव कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल मिलना चाहिए। इससे कम रेट किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

राकेश बैंस के अनुसार, किसानों को फसल की लागत के अनुरूप लाभकारी मूल्य नहीं मिलने के कारण गन्ने की खेती के प्रति उनका रुझान कम हो रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में हरियाणा में गन्ने का रकबा और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
खेती की लागत बढ़ी, लेकिन किसानों की आमदनी नहीं
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र लाठर ने भी गन्ने के मौजूदा भाव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन किसानों की आमदनी में उस अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई। दूसरी ओर, खेती की लागत जरूर लगातार बढ़ती चली गई। उन्होंने बताया कि डीजल, खाद, कीटनाशक दवाइयों, सिंचाई, मजदूरी और कृषि उपकरणों पर किसानों का खर्च काफी बढ़ गया है।
इसके बावजूद किसानों को उनकी मेहनत और उत्पादन लागत के हिसाब से उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। डॉ. लाठर के मुताबिक, महंगाई का असर हर क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। वहीं, चीनी उद्योग गन्ने से चीनी के अलावा अन्य उत्पादों के माध्यम से भी आर्थिक लाभ हासिल करता है। इसके बावजूद गन्ना किसानों को अपनी फसल का लाभकारी मूल्य पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
इसके अलावा, दूसरे किसान संगठन भी इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने की तैयारी में हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में हरियाणा में गन्ने के भाव को लेकर किसान आंदोलन तेज होने की संभावना है। अब देखना होगा कि किसान संगठनों की बैठक में क्या फैसला लिया जाता है और सरकार किसानों की 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग पर क्या रुख अपनाती है।
5 नवंबर की बैठक पर टिकी किसानों की नजर
गन्ने के भाव को लेकर अब 5 नवंबर को कुरुक्षेत्र में होने वाली किसान यूनियन की बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक में किसानों की मांगों, सरकार के फैसले के विरोध और आंदोलन की आगामी रणनीति पर चर्चा होगी।
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