Haryana Land Use Permission : हरियाणा में उद्योग लगाने की योजना बना रहे कारोबारियों और उद्यमियों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन के इस्तेमाल की अनुमति लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब आवेदक ऑनलाइन स्व-प्रमाणन के माध्यम से जरूरी जानकारी, दस्तावेज और निर्धारित शर्तों से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे अनुमति लेने की प्रक्रिया सरल होने और कारोबारियों का समय बचने की उम्मीद है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 12 October 2026
IBN24 NEWS NETWORK : हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि औद्योगिक परियोजना के लिए अनुमति मिलने का मतलब जमीन का इस्तेमाल किसी भी दूसरे काम के लिए करने की छूट नहीं है। जमीन का उपयोग संबंधित क्षेत्र की विकास योजना में निर्धारित प्रमुख भूमि उपयोग के अनुरूप ही करना होगा।
हरियाणा सरकार ने नियमों में किया संशोधन
हरियाणा सरकार ने पंजाब अनुसूचित सड़कों तथा नियंत्रित क्षेत्रों में अनियमित विकास पर रोक संबंधी नियम, 1965 में संशोधन किया है। इस बदलाव का उद्देश्य औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। नई व्यवस्था के तहत आवेदक ऑनलाइन स्व-प्रमाणन के माध्यम से अपनी जानकारी और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत कर सकेगा। इसके अंतर्गत मिलने वाली अनुमति को नगर तथा ग्राम आयोजना विभाग के निदेशक की ओर से दी गई अनुमति के बराबर माना जाएगा।

इस बदलाव से उद्योग स्थापित करने के इच्छुक कारोबारियों को प्रक्रिया संबंधी सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से आवेदन से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करना आसान हो सकता है।
क्या है ऑनलाइन स्व-प्रमाणन की व्यवस्था ?
स्व-प्रमाणन का मतलब है कि आवेदक अपने आवेदन में दी गई जानकारी, दस्तावेजों और निर्धारित शर्तों के अनुपालन की जिम्मेदारी खुद लेगा।
इस व्यवस्था के तहत आवेदक को अपनी ओर से आवश्यक विवरण और प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। इसलिए आवेदन में सही जानकारी देना बेहद जरूरी होगा। गलत जानकारी देने या जरूरी तथ्यों को छिपाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। सरकार का यह कदम उद्योग लगाने की प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ आवेदकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
गलत जानकारी दी तो अनुमति शुरू से मानी जाएगी अमान्य
सरकार ने स्व-प्रमाणन व्यवस्था के साथ आवेदक की जिम्मेदारी भी स्पष्ट कर दी है। यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देता है, महत्वपूर्ण तथ्य छिपाता है या भ्रामक दस्तावेजों के आधार पर अनुमति प्राप्त करता है, तो ऐसी अनुमति शुरू से ही अमान्य मानी जाएगी।
इसका मतलब है कि केवल ऑनलाइन आवेदन जमा कर देना पर्याप्त नहीं होगा। आवेदक को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके सभी दस्तावेज सही हों और परियोजना निर्धारित नियमों तथा शर्तों के अनुरूप हो। इसलिए उद्योग लगाने की योजना बना रहे लोगों को आवेदन करने से पहले जमीन से जुड़े दस्तावेजों और परियोजना की पात्रता की जांच कर लेनी चाहिए।
जमीन का इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए नहीं कर सकेंगे
नियमों में संशोधन के बावजूद जमीन के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण शर्त बरकरार रहेगी। औद्योगिक परियोजना के लिए अनुमति मिलने के बाद भी जमीन या भवन का इस्तेमाल संबंधित क्षेत्र की विकास योजना में निर्धारित प्रमुख भूमि उपयोग के अनुरूप ही किया जा सकेगा।

इसका मतलब है कि औद्योगिक अनुमति को किसी अन्य प्रकार की गतिविधि के लिए स्वतः मंजूरी नहीं माना जाएगा। यदि जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे उद्देश्य के लिए करना है, तो उसके लिए लागू नियमों के अनुसार अलग अनुमति या प्रक्रिया की आवश्यकता हो सकती है। इस प्रावधान का उद्देश्य नियंत्रित क्षेत्रों में अनियोजित विकास पर रोक लगाना और भूमि उपयोग संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
उद्यमियों और कारोबारियों को क्या होगा फायदा ?
नई व्यवस्था से औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है। ऑनलाइन स्व-प्रमाणन के माध्यम से आवेदक आवश्यक जानकारी और दस्तावेज प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे आवेदन की औपचारिकताओं को पूरा करना आसान हो सकता है।
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